चैरशी में अतिथि स्वरूप में पहुंचीं माता कामाक्षा

ठियोग —तहसील ठियोग की क्यार पंचायत के तहत आने वाले बांदली में हर बार की तरह आयोजित किए जाने वाले देव कार्य चेरशी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलाहर से माता कामाक्षा अपनी पालकी में वाद्य यंत्रों के साथ अतिथि स्वरूप बांदली गांव पहुंची और क्षेत्र के लोगों को सुख समृद्वि का आर्शीवाद दिया। यहां पर माता कामाक्षा मंदिर कमेटी के प्रमुख लोगों के अलावा माता के कलेणों ने बांदली गांव के स्थानीय वासी सीरीराम शर्मा, रामदत शर्मा, बेघाराम, बाबूराम, रोशन, लायकराम शर्मा, कृष्ण दत, केशवराम सहित कई अन्य लोग इस देव कार्य में सैकड़ों लोग प्रमुख रूप से शामिल थे। इससे पहले माता कामाक्षा सुबह करीब 11 बजे चैरशी के लिए बांदली पहुंची जिसके बाद माता का यहां पधारने पर भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद एक खुले खेत में माता की पूजा हुई और गांवों वालों ने माता को भोग लगाकर आशीर्वाद लिया। यहां बादंली गांव के स्थानीय वासी सीरीराम शर्मा ने बताया कि माता को यहां पर आमंत्रित किया जाता है और पूरे विधी विधान के साथ माता की पूजा अर्चना की जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से गांव के लोग इस देव परंपरा को निभा रहे हैं। एक तरह से चैरशी का आयोजन क्षेत्र की सुख समृद्वि के लिए भी किया जाता है और लोग अपने परिवार के लिए माता से आर्शीवाद लेते हैं साथ ही अपनी फसलों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए भी माता से आग्रह करते हैं कि उनकी खेतों में लगी फसलों को सालभर किसी प्रकार का नुकसान न हो इसके लिए वे उनके ऊपर कृपा बनाए रखें। इस दौरान माता कामाक्षा के गुर अपनी देव वाणी से लोगों को सही रास्ते पर ले जाने का आर्शीवाद देते हैं। बताया जाता है कि माता कामाक्षा के बारह बीश के कलेणें माता की सभी पुरानी परंपराओं को धीरे-धीरे समाप्त करने पर आ गए थे लेकिन तभी माता ने अपने दिव्य शक्ति से हर घर में अपने कलेणों को ये अहसास करवाना शुरू किया कि देव परंपराओं का निवर्हन कितना जरूरी है। जिसके बाद बारह बीश में पिछले साल से करीब 50 साल बाद भूंडे शुरू किए गए हैं जबकि इसके अलावा सांबर गांव के साथ लगने वाली रिहाली को भी कुछ समय के लिए बंद करवा दिया गया था लेकिन अब इसे भी शुरू कर दिया गया है। जबकि धवाला भी कलेणों से लिया जा रहा है। इसी तरह के कई देव परंपरा से जुड़े कार्य जोकि बीच में कुछ समय के लिए बंद होने शुरू हो गए थे इसे अब दोबारा से शुरू करवाया जा रहा है। चैरशी भी इसी तरह से देव परंपरा से जुड़ा एक दैविक कार्य है इस कार्य में सैंकड़ो देवलू भाग लेते हैं। माता कामाक्षा ने लोगों को आर्शीवाद दिया।

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