छह कंपनियों की दवाइयां फेल

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में खुलासा, देश के 29 उद्योगों की दवाएं सब स्टैंडर्ड

  बीबीएन —केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में देश के 29 दवा उद्योगों में निर्मित दवाएं सब-स्टैंडर्ड पाई गई हैं। इस फेहरिस्त में प्रदेश के छह दवा उद्योग भी शामिल हैं, जिनमें निर्मित संक्रमण, दर्द व बुखार के उपचार की दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर खरी नहीं उतर पाई हैं। सीडीएससीओ द्वारा जारी अप्रैल के ड्रग अलर्ट का संज्ञान लेते हुए राज्य दवा नियंत्रक ने हिमाचल के उपरोक्त दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए संबंधित दवाओं का पूरा बैच बाजार से हटाने के आदेश दे दिए हैं। इसके अलावा एनएसक्यू सैल को ड्रग अलर्ट में शामिल उद्योगों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जानकारी के मुताबिक अप्रैल के ड्रग अलर्ट में देश के विभिन्न राज्यों में निर्मित दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर सही नहीं पाई गई हैं। जो दवाएं बेअसर साबित हुई हैं, उनमें गैस्ट्रिक, संक्रमण, ब्लड क्लाउटिंग, एलर्जी, बुखार, के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इस अलर्ट में बरोटीवाला, सोलन, बद्दी, पांवटा साहिब स्थित छह उद्योंगों में निर्मित दवाओं के अलावा महाराष्ट्र्र, उत्तराखंड, गुजरात, उत्तरप्रदेश, गोवा, पंजाब के 23 उद्योगों में निर्मित दवाओं के सबस्टैंडर्ड होने का खुलासा हुआ है। दवाइयों के ये सैंपल दवा प्राधिकरण के पंचकूला, चेन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता, हैदराबाद, आसाम, जम्मू द्वारा लिए गए थे, जिनकी औषधि परीक्षण प्रयोगशालाआें में जांच करवाई गई। जांच के दौरान इन दवाओं के सबस्टैंडर्ड होने का खुलासा हुआ।

1095 नमूनों का परीक्षण

सीडीएससीओ के अनुसार कुल 1095 सैंपल का परीक्षण किया, जिनमें से 1064 दवाएं सही पाई गई हैं, जबकि 31 दवाएं सब स्टैंडर्ड/नकली/मिस ब्रांडेड निकली हैं। सनद रहे कि देश भर में परीक्षण के दौरान गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाले दवा उत्पादों के इस्तेमाल से आम जनता को रोकने के मकसद से केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने ड्रग अलर्ट जारी करने की कवायद शुरू कर रखी है।

लापरवाही नहीं चलेगी

राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने बताया कि प्रदेश में निर्मित जिन दवाओं के सैंपल सबस्टैंडर्ड पाए गए हैं, उन कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया गया है साथ ही दवा निर्माताओं को बाजार से इन दवाओं का पूरा बैच हटाने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा प्राधिकरण का एनएसक्यू सैल भी अलग से इन उद्योगों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सोंपैंगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता पूर्ण दवा निर्माण में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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