छात्र के फर्ज को खूब निभाया साइंस टॉपर ने

जमा एक की परीक्षा में जब 77 प्रतिशत अंक हासिल किए तो, मुझे अपने पिता की याद आई कि मेरे पिता मुझे खेतीबाड़ी कर कुल्लू में पढ़ा रहे हैं और मैं इतने कम अंक ले रहा हूं, लेकिन बहुत गलत है कि जब मुझे सिर्फ  पढ़ाई के लिए यहां किराए के भवन में रखा गया तो मेरा फर्ज बनता है जी जान से पढ़ाई करना।

जब इस सोच पर मैंने अपना कार्य आरंभ किया और गुरुओं का मुझे तहदिल से ज्ञान मिला तो इसका नतीजा मेरा जमा दो का परीक्षा परिणाम है। स्कूल के जाने के बाद मैं सिर्फ  दो घंटे अपना मन लुभाने के लिए चहल-कदमी करता था और उसके बाद होमवर्क शुरू करता था। यह कुछ बात हाल में ही जमा दो की बोर्ड परीक्षा में साईंस में टॉपर रहे अनिल कुमार ने दिव्य हिमाचल से साझा की। बता दें कि पांगी के अति दुर्गम क्षेत्र अजोग के रहने वाले अनिल कुमार ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की जमा दो  परीक्षाओं में साईंस में प्रदेश भर में पहला स्थान हासिल किया है।

अनिल ने 500 अंकों में से 493 अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। 98.6 प्रतिशत अंकों के साथ अनिल प्रदेश भर के छात्र छात्राओं के लिए आर्दश बन गए है।अनिल का कहना है कि भविष्य में वह इंजीनियर बनकर देश सेवा करना चाहता है जिसके लिए वह अभी से ही तैयारियां कर रहा है। पढ़ाई के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा है।अनिल के पिता देवराज किसान हैं और माता गृहणी है वे अजोग में ही रहते हैं, लेकिन बेटे को पढ़ाई के लिए कुल्लू में किराए का कमरा लिया और ढालपुर स्थित साईं स्टार स्कूल में पढ़ाई की। अनिल का कहना है कि जब उसे जब यह पता चला कि उसका पूरे प्रदेश में पहला स्थान आया है तो मेरी खुशी का ठिकाना न था।कुछ देर जब रिजर्ल्ट चैक किया तो उसके बाद माता पिता को घर फोन पर इसकी सूचना दी। अनिल कहता है कि घर से इतना दूर रहकर घरबालों की याद तो आती है, लेकिन अपने आप को पढ़ाई में व्यस्त रखने का प्रयास करता हूं जिसका परिणाम यह निकला और स्कूल के अध्यापकों ने मेरा हर कदम पर सहयोग किया है। अनिल कुमार की इस सफलता के बाद स्कूल में उत्सव का माहौल बना हुआ है। छात्र को स्कूल में सम्मानित किया गयाए फूलों  के हार पहनाकर छात्र का स्वागत किया। वह इंजीनियर बनना चाहता है।

मु़लाकात : छात्रों को अपने ऊपर पूरा भरोसा रखना बहुत जरूरी…

कोई सोच जिसने जिंदगी की राह बदल दी?

नौवी कक्षा के बाद सोच में यूं बदलाव आया कि पढ़ाई किस तरीके से करनी है। जब विषय अलग-अलग हुए तो पढ़ाई में भी अंतर आया।

अपनी ताकत को कैसे पहचाना?

दसवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था, तो उस दौरान दक्षिणा फाउंडेशन का एग्जाम मंडी में हुआ था। उस दौरान  मैं हिमाचल से अकेला सिलेक्ट हुआ था। इस एग्जाम से मुझे काफी ताकत मिली थी।

पांगी से कुल्लू तक के सफर में जो सीखा?

पांचवीं तक की पढ़ाई राजकीय प्राथमिक स्कूल अजोग में की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय चंबा में दसवीं तक की पढ़ाई की। इस बीच महाराष्ट्र में भी पढ़ाई करने का मौका मिला। इसके बाद कोटा जाने का मौका भी मिला। जमा एक और जमा दो की पढ़ाई के लिए कुल्लू आना पड़ा। इस सफर में बहुत कुछ सीखने के लिए मिला।

जमा दो परीक्षा की तैयारी कैसे की?

जमा दो परीक्षा की तैयारी प्रति सब्जेक्ट रिविजन के साथ शुरू की गई] अगर दिन में पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला तो रात के दो बजे तक पढ़ाई करता था।

आपके लिए मानसिक तनाव के मायने क्या हैं और इससे निजात पाने का आपका तरीका ?

यू-ट्यूब में फ्री समय में मन को लुभाने के लिए गीत सुने जाते थे। वहीं, दोस्तों के साथ कुछ पल बिताए जाते थे। वहीं, मोबाइल में गेम्स भी खेली जाती थी।

कितनी सहज या सरल है आपके लिए शिक्षा?

शिक्षा आसान है। अपने ऊपर भरोसा होना बेहद लाजिमी है।

असफलता और सफलता के बीच आप अपने भीतर की बुलंदी को  कैसे  तसदीक करेंगे?

असफलता का मतलब है कि सफलता कुछ समय के लिए रूक गई है, लेकिन सफलता हासिल करने के लिए थोड़ी सी मेहनत की जरूरत होती है, मुकाम जरूर हासिल होता है।

अगर पांगी में ही रहते, तो ऐसे में अपने पिता के प्रोत्साहन को कैसे देखते हैं?

माता-पिता के प्रोत्साहन ने मुझे आज यहां तक पहुंचाया है। मेरे गांव-क्षेत्र  के स्कूलों में अध्यापकों का टोटा चल रहा है। ऐसे में मेरे परिजनों ने मुझे पढ़ाई के लिए कुल्लू भेजा।

मां-बाप के सामने या खुद से आपकी प्रतिज्ञा क्या है?

मां-बाप का सहयोग मेरे लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है। बच्चों को मां-बाप की प्रतिज्ञा जिंदगी बनाती है।

साइंस जमा दो में टॉपर बनने से आपके भीतर का विश्वास अब क्या कह रहा है?

बहुत सारी उम्मीदें हैं। अब प्रशासनिक सेवा की ओर ध्यान करूंगा और एक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता हूं। पहले आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता हूं। वहीं, जेईई मेन्स में भी मेरे 95ः89 प्रतिशत अंक हैं।

इस सफलता को अगर साझा करना हो, तो छात्रों को आपके तीन प्रमुख सुझाव?

इस सफलता को साझा करने के लिए छात्रों को मेरा पहला सुझाव अपने ऊपर भरोसा रखना। अपनी कमियों को पहचानना और अपनी असफलताओं से सीख लेना मेरे सुझाव हैं।

पांगी घाटी की संस्कृति से निकला कोई लोकगीत जो आपके दिल को छूता हो?

हरे-हरे दियार थांदल धारे इन्हा वे पुहाला बांसूरी लाए  लोकगीत दिल को छू लेता है। यह हमारी संस्कृति को दर्शाता है।

— मोहर सिंह पुजारी, कुल्लू

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