जंगल की आग से हरा-भरा बागीचा स्वाह

स्वारघाट—वन परिक्षेत्र स्वारघाट के तहत जंगल मतनोह, जंगल मुंडखर और जंगल काथला में बुधवार शाम को लगी आग ने भारी तबाही मचाई है। आग से जहां तीन जंगलों में लाखों की वन संपदा राख हुई और सैकड़ों जीव झुलसे या बेघर हुए, तो वहीं लोगों की निजी संपत्ति भी आग की भेंट चढ़ी है। इस आगजनी की घटना से मतनोह निवासी अधिवक्ता घनश्याम रनोट पुत्र स्व. करतार सिंह का बागीचा जलकर राख हो गया है। घनश्याम रनोट ने बताया कि जंगल में भड़की आग से बुधवार रात उसका विभिन्न प्रकार की इमारती लकड़ी और फलदार पौधों का बागीचा जलकर राख हो गया है। आग से बागीचे में लगे सारे पेड़-पौधे झुलस गए हैं। उसके बागीचे में चंदन के 60 पेड़, नींबू के 50 पौधे, कटहल  के दो पौधे, आम के 50 पौधे, चील के करीब 500 पेड़ आग की चपेट में आकर झुलस गए हैं। इसके अतिरिक्त बागीचे में आंवला, नाशपाती, रीठा, तुह्नी और टाली आदि के अनगिनत पौधे लगाए थे, जो कि आग की भेंट चढ़ गए हैं। घनश्याम रनोट ने बताया कि बुधवार देर रात आग उसके घर और घास के स्टोर के समीप पहुंच चुकी थी। उन्होंने दमकल चौकी नयनादेवी में फोन कर फायर ब्रिगेड मंगवाई थी और दमकल कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू कर बुझा दिया, लेकिन बागीचे को नहीं बचा पाए। घनश्याम रनोट ने वन विभाग को किसी प्रकार की शिकायत नहीं दी है उनका कहना है कि आग अचानक लगी है, जिसे न तो विभाग ने लगाया है और न ही किसी व्यक्ति विशेष ने, इसलिए उन्होंने नुकसान को सह लिया है तथा विभाग से किसी तरह की राहत राशि की मांग नहीं की है। उन्होंने केवल वन विभाग को सुझाव दिए हैं।

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