जड़ी-बूटियों को बाजार देगी सरकार

आयुर्वेद-मेडिसिनल प्लांट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी तैयार

 शिमला —हिमाचल प्रदेश की जड़ी-बूटियों को मार्केट दिलाने के नजरिए से इससे जुड़ी कंपनियों को यहां पर विशेष रियायतें देने की योजना बनाई गई है। प्रदेश सरकार ऐसी कंपनियों को रियायतें देने के साथ हिमाचल के जंगलों में मौजूद जड़ी-बूटियों की इन कंपनियों द्वारा खरीद को भी सुनिश्चित करेगी। इस संबंध में कई कंपनियों के साथ बात हुई है, जो हिमाचल से जड़ी-बूटियों को खरीदना चाहती हैं। कई नामी कंपनियां इसके लिए आगे आने के लिए तैयार हैं जिनसे विस्तार से चर्चा हो चुकी है। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने आयुर्वेद व मेडिसिनल प्लांट्स  पर आधारित उद्योगों के लिए पॉलिसी बनाई है। इस पॉलिसी का प्रारूप तैयार है और इस पर मुख्य सचिव के साथ भी चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार रखने को कहा गया है, जिसे चुनाव के बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। गौर हो कि पहाड़ी राज्य में प्रकृति का अपार भंडार है। इस भंडार के उचित दोहन के लिए अब तक विशेष प्रयास नहीं किए जा सके हैं। गांव के बुजुर्ग लोग आज भी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग इसे भुला चुका है। लोगों को जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी देने और इसे स्वरोजगार के लिए जोड़़ने की दृष्टि से सरकार ने पिछले दिनों कुछ प्रयास शुरू किए हैं। यहां पर बायोडाइवर्सिटी,  मेडिसनल आदि के लिए अलग से विंग स्थापित हुआ है, जो इस तरफ काम कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए गए हैं, जिसके लिए कई सेमिनार अलग-अलग जिलों में हो चुके हैं। विशेषज्ञों की सलाह के बाद एक पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया गया है। डाबर जैसी कंपनी भी इस क्षेत्र में निवेश की इच्छा रखती है। इतना ही नहीं, एक महीने पूर्व कुछ कंपनियों के साथ यहां पर एमओयू भी हो चुके हैं और इन्हें धरातल पर उतारने के लिए प्रयास चल रहा है। आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करने वाली कंपनियों ने भी बातचीत की है। यहां आयुर्वेद व मेडिसिनल प्लांट्स को यहां आने वाली कंपनियों के लिए भी नई पॉलिसी बनाई गई है। इसमें कंपनियों को विशेष इन्सेंटिव दिए जाएंगे।

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