जनता पार्टी ने चारों सीटें जीत की थी शुरुआत

लोकसभा चुनावों पर भाजपा-कांग्रेस ने टिकने नहीं दिया कोई और दल

शिमला -पहाड़ी राज्य में लोकसभा चुनाव की शुरुआत में जनता पार्टी ने अपना खाता खोला था और उस चुनाव में दूसरे किसी भी दल को एक भी सीट हासिल नहीं हुई। इसके बाद जनता पार्टी फिर भारतीय जनता पार्टी में तबदील हो गई थी। हिमाचल में लोकसभा चुनाव पर हमेशा से भाजपा और कांग्रेस का ही कब्जा रहा। कभी कांगे्रस ने चारों सीटें जीतीं, तो कभी भाजपा ने कब्जा जमाया। एक दफा क्षेत्रीय दल हिमाचल विकास कांगे्रस को यहां एक सीट जीतने में सफलता मिली, जिसके वही प्रत्याशी कांग्रेस में शामिल हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 1977 में लोकसभा चुनाव की शुरुआत यहां हुई, जिसमें जनता पार्टी ने चारों सीटें जीतकर रिकार्ड कायम किया। इसके बाद 1980 में लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें कांगे्रस ने चारों सीटें कब्जे में कीं। कांग्रेस ने यहां से अपनी शुरुआत की और 1984-85 में फिर से चारों सीटों पर कब्जा जमाया। इसके बाद फिर भाजपा लगातार मुकाबले में रही। उसने 1989 में हुए चुनाव में तीन सीटों पर जीत दर्ज की और एक सीट कांग्रेस को मिल पाई, जिसके बाद 1991 में फिर से लोकसभा का चुनाव हुआ। इसमें भाजपा को दो सीटें मिलीं, वहीं कांगे्रस ने भी दो सीटें झटकीं। इस चुनाव में दोनों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने वापसी करते हुए चारों सीटों पर कब्जा जमाया, वहीं वर्ष 1998 में भाजपा ने तीन सीटों पर दबदबा रखा, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली। वर्ष 1999 में पहली दफा एक क्षेत्रीय दल ने शिमला संसदीय सीट जीती। तब भाजपा के साथ हिमाचल विकास कांग्रेस ने गठबंधन किया और तीन सीटों पर भाजपा और एक में हिविकां का कब्जा हुआ।

बनता-बिगड़ता रहा चुनावी गणित

2004 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को फिर एक ही सीट मिल पाई, जबकि कांगे्रस को तीन सीटें हासिल हुईं। इसके बाद वर्ष 2009 के चुनाव में भाजपा ने तीन सीटें हासिल की और कांग्रेस को एक ही सीट से संतोष करना पड़ा। 2014 में फिर भाजपा की लहर चली, तो चारों सीटों पर उसी का कब्जा हो गया। कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव में कांगे्रस व भाजपा के बीच मुकाबला होता रहा है। कभी चारों सीटें तो कभी एक ही सीट से इन राजनीतिक दलों को संतोष करना पड़ता है। प्रदेश का चुनावी गणित हर बार ऐसे ही बिगड़ता-बनता रहा है।

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