… जब 13 तोपों की सलामी को चुने महाराजा शमशेर प्रकाश

नाहन—रियासत कालीन हैरिटेज सिटी नाहन में 1621 में राजधानी के बाद सबसे चर्चित और विकास कार्यों को तवज्जो देने वाले शासक ने सबसे अधिक कार्यकाल तक राज किया उनमें महाराजा शमशेर प्रकाश का नाम सबसे ऊपर है। सिरमौर रियासत में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1857 से 1898 तक लगभग 42 वर्ष सिरमौर रियासत में महाराजा शमशेर प्रकाश ने रियासत के 45वें शासक के रूप में बेहतरीन शासन किया। वहीं मई माह में 1842 में जन्मे महाराजा रघुवीर प्रकाश के पुत्र को उनके जन्म माह मंे याद किया जा रहा है। नाहन शहर में आज भी लिटन मेमोरियल, शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, शमशेर विल्ला, शमशेर कैंट आदि महत्त्वपूर्ण स्थल महाराजा शमशेर प्रकाश के शासन व्यवस्था को दर्शाते हैं। राज परिवार की राजकुमारी दिव्याश्री बताती हैं कि ब्रिटिश सरकार के दौरान सभी पंजाब के हिल राज्यों में उनके अनुकरणीय शासन प्रबंधन को सराहा गया, जिसके फलस्वरूप महाराजा शमशेर प्रकाश को 1896 में केसीएसआई और 1886 में जीसीएसआई की उपाधि सहित 13 तोपों की सलामी के लिए चयनित किया गया। राजकुमारी दिव्याश्री ने बताया कि महाराजा शमशेर प्रकाश ने अपने शासन काल के दौरान कृषि, कला, शिक्षा, अस्पताल, पोस्ट आफिस, नाहन आयरन फाउंडरी, सिरमौर टी एस्टेट जैसे कई महत्त्वपूर्ण संस्थानों को खोलकर नाहन रियासत मंे विकास कार्यों की ओर अग्रसर किया। अपने शासन काल मंे महाराजा शमशेर प्रकाश ने एग्रीकल्चर बोर्ड का गठन कर सहारनपुर से फलों, सब्जियों के बीज सहारनपुर के बोटानिकल गार्डन से मंगवाए, जबकि गेहूं का बीज फ्रांस से तथा मक्की का बीज अमेरिका से मंगवाकर अपनी रियासत के किसानों को वितरित किए, जिसके लिए उन्होंने डा. निकोलस और सुपरिडेंट एग्रीकल्चर बोर्ड नियुक्त किया। महाराजा शमशेर प्रकाश ने आर्ट का एक स्कूल एफआर जोन्स के अंतर्गत आरंभ किया, जिसमें रियासत के छात्रों को एनरोल किया गया, जबकि लखनऊ से सुनार, होशियारपुर से बढ़ई, रूड़की से ड्राफ्समैन बुलाकर रियासत के छात्रों को तकनीकी शिक्षा देने की भी व्यवस्था की। स्वास्थ्य के लिए उन्होंने चैरिटेबल ट्रस्ट डिस्पेंसरी की नाहन में व्यवस्था की तथा तत्त्कालीन दौर में 10 हजार की दवाइयां लंदन से मंगवाकर डा. पीयरसॉल को भी नियुक्त किया। राजकुमारी दिव्याश्री ने बताया कि हालांकि पोस्ट आफिस को नाहन में ब्रिटिश हुकूमत ने शुरू किया था, मगर सिरमौर के दूरदराज के क्षेत्रों में डाक पहुंचाने और कई मर्तबा न मिलने के चलते महाराजा शमशेर प्रकाश ने प्रिंटिड स्टैंप को लंदन से मंगवाकर डाक टिकट के रूप में पोस्ट आफिस का व्यवहार शुरू किया। महाराजा शमशेर प्रकाश के शासन काल में सुप्रसिद्ध नाहन फाउंडरी को 1867 को आरंभ किया गया, जोकि अंतिम महाराजा राजेंद्र प्रकाश के शासन काल तक भी सिरमौर अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुई। सिरमौर रियासत की सीमा देहरादून तक थी। लिहाजा महाराजा शमशेर प्रकाश ने ब्रिटिश से 20 हजार पॉड में चाय का बागान खरीदा, जिसका राजस्व राज्य के कल्याण के लिए खर्चा किया जाता था। महाराज कुमारी दिव्याश्री ने बताया कि महाराजा शमशेर प्रकाश के शासन काल के दौरान प्रेस का प्रयोग करते हुए सिरमौर गजट और अमर पत्रिका का प्रकाशन भी हुआ। वहीं सिरमौर रियासत के दीर्घकालीन शासनकर्ता जिन्हें नाहन रियासत में विकास कार्यों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। दो अक्तूबर, 1898 को संसार से विदा हो गए। आज भी नाहन मंे रियासतकालीन स्मारक उन महान शासक की विकासात्मक सोच को दर्शाते हैं।

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