जयराम के सियासी कद पर फाइव स्टार

शिमला —लोकसभा चुनावों में भाजपा को एकतरफा जीत दिलाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का सियासी कद और बढ़ गया है। हिमाचल में न केवल जीत का इतिहास दोहराया गया है, बल्कि बड़ी जीत के अटूट रिकार्ड स्थापित किए हैं। मोदी-शाह के भरोसेमंद रहे जयराम ठाकुर को बड़ी जीत दिलाने पर अब अगले एक दशक तक हिमाचल का फ्री हैंड मिलना तय है। मुख्यमंत्री हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा धूमल सरकार के मंत्रिमंडल में होने के कारण उन्हें मंत्रीपद का भी अनुभव है। इसके चलते लोकसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ने सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाया। सीएम ने अकेले मोर्चा संभालते हुए अपने दम पर लोकसभा चुनावों के लिए 106 रैलियां आयोजित कीं। पैर में गंभीर चोट के बावजूद सीएम की जनसभाएं किन्नौर से लेकर भरमौर तक प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में हुईं। केंद्रीय राजनीति में हिमाचल के कद्दावर नेता जेपी नड्डा को अपने गृह राज्य में प्रचार के लिए समय नहीं मिला। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने अधिकतर समय हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में लगाया। शांता कुमार ने शिमला तथा मंडी में कुछ एक चुनावी जनसभाएं जरूर कीं, लेकिन उनका भी अधिकतर समय कांगड़ा में बीता। स्टार प्रचारकों की लंबी-चौड़ी सूची में दर्ज 30 नेताओं के भी हिमाचल में दर्शन नहीं हुए। लिहाजा हिमाचल में वर्ष 2014 की जीत को दोहराने का सारा दारोमदार जयराम ठाकुर के कंधों पर आ गया। मुख्यमंत्री ने संगठन को सही दिशा-निर्देश में लगाते हुए अपनी पूरी ताकत चुनाव में झोंक दी। इसके चलते कांगड़ा में किशन कपूर चार लाख 77 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए हैं। एंटी इन्कमबेंसी झेल रहे रामस्वरूप शर्मा को मुख्यमंत्री ने चार लाख से अधिक मतों से जीत का स्वाद चखा दिया। कमजोर आंकी जा रही शिमला संसदीय क्षेत्र की सीट को भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बड़े अंतर के साथ जीताने में सफल रहे। जीत की हैट्रिक लगा चुके सांसद अनुराग ठाकुर ने भी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में मैसिव विक्ट्री हासिल की है। इस जीत में मुख्यमंत्री की भूमिका जगजाहिर है।

 

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