जयराम सरकार का अनूठा कीर्तिमान

शिमला—जयराम सरकार ने छह माह के भीतर 70 करोड़ की नई पेयजल योजना का निर्माण कर शिमला शहर को एक करोड़ लीटर पानी पहुंचा दिया है। विकट परिस्थितियों में सतलुज के पानी को उठाकर तैयार की गई इस स्कीम के बाद अब शिमला में जल संकट उड़न छू हो जाएगा। अहम है कि हिमाचल सरकार की अल्प अवधि में बनकर तैयार हुई 17 किलोमीटर लंबी यह सबसे बड़ी पेयजल योजना है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले साल शिमला शहर में उत्पन्न हुए जल संकट से निपटने के लिए इस योजना के निर्माण के निर्देश दिए थे। बताते चलें कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य विभाग के सचिव देवेश कुमार और ईएनसी सुमन विक्रांत ने 30 अप्रैल तक योजना को पूरा करने का मुख्यमंत्री को भरोसा दिया था। इसके चलते आईपीएच विभाग के अधिकारियों ने दिन-रात एक कर रिकॉर्ड छह माह में 70 करोड़ की पेयजल योजना का निर्माण कार्य पूरा करने का करिश्मा कर दिखाया है। शिमला को जल संकट से निजात दिलाने वाली इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव विनीत चौधरी की भी खासी भूमिका रही थी। इसके अलावा तत्कालीन शहरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने भी इस योजना के निर्माण के लिए खूब पसीना बहाया था। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि सतलुज के पानी को शिमला पहुंचाने के लिए दिन रात एक करने वाले उक्त आला अफसरों का अब श्रेय लेने के समय इस स्कीम से कोई नाता नहीं है। विनीत चौधरी रिटायर हो गए हैं और रामसुभग सिंह का विभाग बदल गया है। आईपीएच के सचिव देवेश कुमार राज्य चुनाव अधिकारी हैं तथा ईएनसी सुमन विक्रांत भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बताते चलें कि इन अधिकारियों की इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दिशा निर्देशों से ही शिमला की प्यास बुझाने वाली इस योजना का निर्माण कार्य पूरा हो पाया है। हालांकि प्रदेश सरकार की कई पेयजल स्कीमें दशकों से निर्माणाधीन है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जल संकट के दौरान शिमला की दुनियाभर में फजीहत हुई थी। इस भयंकर समस्या पर नई नवेली जयराम सरकार को भी विपक्ष ने कटघरे में खड़ा किया था। इसके चलते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह दावा किया था कि अगले साल बरसात से पहले जल संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारी होगी। इसी के चलते सतलुज से 17 किलोमीटर लंबी पेयजल योजना का निर्माण कर 10 एमएलडी पानी चाबा पहुंचाया गया है। अब इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए आईपीएच विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा और ईएनसी नवीन पुरी के प्रयास भी रंग लाए हैं।

You might also like