जल संरक्षण के प्रबंध जरूरी

May 9th, 2019 12:05 am

सुखदेव सिंह

लेखक, नूरपुर से हैं

जल भंडारण टैंकों की सफाई करने के लिए सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को सावधानी बरतने की जरूरत है। विभाग अकसर जल भंडारण टैंकों में ब्लीचिंग पाउडर डालकर पहले उनकी सफाई किया करता था। प्राकृतिक जल स्रोत कुएं, बावडि़यां और झरने अब लुप्त होते जा रहे हैं। जल का भंडारण किए बगैर ही सीधे उसे जनता को पीने के लिए सप्लाई किया जाना स्वास्थ्य लिहाज से सही नहीं लगता है। जनता का स्वास्थ्य बेहतर रहे, इसकी देखभाल करने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग का है…

जल ही जीवन है, मगर अब इस बात को समझे कौन? ‘जल की एक-एक बूंद कीमती है’, यह पंक्तियां सिर्फ दीवारों और पानी की टंकियों पर पढ़ने को ही अच्छी लगती हैं। हकीकत तो यह है कि हम न तो पानी की महत्ता को पहचान पा रहे हैं और न ही इसे भविष्य के लिए संजोकर रखने को कोई ठोस प्रयास कर रहे हैं। दूषित जल पीने से आजकल सबसे ज्यादा बीमारियां फैल रही हैं और किडनियां तक खराब हो रही हैं, जिसकी पुष्टि भी सार्वजनिक हो चुकी है। पानी देखने में तो साफ लगता है, मगर उसमें कितनी खामियां हैं, यह सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही बता सकता है। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में भी बताया गया है कि कुछ राज्यों के पानी में यूरेनियम की मात्रा कहीं अधिक पाए जाने से कई बीमारियां उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है। गर्मियों में   दूषित जल पीने से तेज बुखार, डायरिया, उल्टियां, दस्त और सिर में दर्द रहने की बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दूषित जल पीने से उत्पन्न हुई बीमारी कितने लोगों को लील गई, सब भलीभांति जानते हैं। पानी के टैंकों में नर कंकाल साल बाद मिलना भी इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं इनसान के स्वास्थ्य से कोताही बरती जा रही है।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिछाई जाने वाली पानी की पाइपें जमीन के अंदर पूरी तरह नहीं होती हैं। नतीजतन अकसर ऐसी पानी की पाइपें टूट जाती हैं और विभाग समय पर गौर नहीं करता। जब पानी सप्लाई किया जाता है, तो अकसर टूट गई पाइपों से पानी बाहर निकलता है और बाद में वही गंदा पानी पाइपों के अंदर चला जाता है। पानी भंडारण के बड़े टैंकों की सफाई साल में कम से कम चार बार  होनी ही चाहिए। पानी भंडारण टैंकों की सफाई कब की गई और अगली सफाई कब की जाने वाली है, उसकी अग्रिम तारीख भी टैंकों पर अंकित करना समय की मांग है। ऐसे जल भंडारण टैंकों की सफाई करने के लिए सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को सावधानी बरतने की जरूरत है। विभाग अकसर जल भंडारण टैंकों में ब्लीचिंग पाउडर डालकर पहले उनकी सफाई किया करता था। प्राकृतिक जल स्रोत कुएं, बावडि़यां और झरने अब लुप्त होते जा रहे हैं। जल का भंडारण किए बगैर ही सीधे उसे जनता को पीने के लिए सप्लाई किया जाना स्वास्थ्य लिहाज से सही नहीं लगता है। जनता का स्वास्थ्य बेहतर रहे, इसकी देखभाल करने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग का है। स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर वाटर सप्लाई में पानी के सैंपल परखने चाहिए। क्या वास्तव में जनता को पीने के लिए परोसा जा रहा पानी, पीने लायक है? सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कार्य प्रणाली कभी-कभार सिर्फ गर्मियों में ही कुछेक स्थानों पर देखने को मिलती है। माना कि विभाग में स्टाफ की कमी है, मगर इनसान के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी नहीं किया जा सकता है। पाइपों की गुणवत्ता सही नहीं होने की वजह से भी उन्हें जंग लग जाता है और इससे पानी के दूषित होने के आसार रहते हैं। मिनरल वाटर कंपनियों की इस समय बाजारों में मानो बाढ़ सी आ गई है। मिनरल वाटर में पोटाशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, केल्शियम, सल्फेट, क्लोराइड, फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने के कारण भी ऐसा बोतल बंद जल लोगों के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं हो सकता है। मिनरल वाटर बोतल से लोग खड़े होकर पानी पीना अब अपनी आदत बना चुके हैं। बिना गिलास सीधे बोतल से पानी पीना स्वास्थ्य लिहाज से खतरनाक साबित हो रहा है। बोतल का पानी किडनी को साफ किए बगैर ही तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे गेस्टिक, अल्सर, संक्रमण आदि रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मियों में पानी की प्यास कहीं अधिक बढ़ जाती है और इसलिए पानी बैठकर ही पीना चाहिए। गिलास से पीया जाने वाला पानी मनुष्य की किडनी को साफ करके उस कचरे को मल-मूत्र के जरिए शरीर से बाहर निकालता है। इनसान को पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।

घरों में जब से फ्रिज ने डेरा जमाया है, तब से लोगों को बासी खाना खाने की आदत पड़ चुकी है। फ्रिज को किस तापमान पर रखकर उसका उपयोग करना है, यह अधिकांश लोग नहीं जानते हैं। फ्रिज में रखी पानी की ठंडी बोतलों से लोग अपनी प्यास बुझाने की कोशिश करते हैं। सच्चाई यह है कि फ्रिज का पानी प्यास बुझाने की बजाय इनसान के शरीर की पाचन क्रिया को ही बिगाड़कर रख देता है। खाना खाने के तदोपरांत जल्द पीया जाने वाला फ्रिज का ठंडा पानी अकसर पेट में बदहजमी और कब्ज बढ़ाने का काम करता है। एक ही पानी की बोतल को लगातार महीनों इस्तेमाल करने से भी शरीर में संक्रमण पैदा होता है। गर्म पानी पीना सेहत के लिहाज से लाभदायक माना जाता है। पानी को गर्म करने से यह कीटाणु रहित बनकर साफ हो जाता है। गर्म पानी इनसान के शरीर में बंद पड़ी नसों में रक्त संचार बढ़ाने में भी सहायक होता है। एक समय ऐसा था कि घरों में देशी फ्रिज कच्चे घड़ों का ठंडा पानी पीना लोगों की पहली पंसद होती थी। लोगों ने मिट्टी से बने कच्चे घड़ों को नकारकर उसकी जगह प्लास्टिक की बाल्टियों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

मिट्टी के कच्चे घड़े के नीचे रेत रखने से वह जल को और भी शीतल बना देता था। आजकल गर्मियों के मौसम में लोग गांवों में टियालों और सड़क किनारे मिट्टी के कच्चे घड़ों में पानी लोगों को पीने के लिए रखकर पुण्य कमाने की सोच रखते थे। बदलते दौर में अब लोग चौबीस घंटे बिजली से  चलने वाले फ्रिज के पानी के मोहताज हो गए हैं। ठंडा पानी पीने का लोगों का जरिया तो बदला, परंतु दुखद यह कि अब भी लोग पानी की अहमियत को नहीं समझ पा रहे हैं। पानी को बर्बाद करना जैसे अपनी रिवायत बन चुकी है। लोगों को यह याद रखना चाहिए कि गर्मियों में पानी के लिए तरसना पड़ता है, इसलिए इसे कम से कम बर्बाद करें। अपनी आवश्यकता अनुसार ही इसका प्रयोग करें, ताकि जल की होने वाली कमी को दूर करने में थोड़ा-बहुत योगदान किया जा सके।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या कर्फ्यू में ताजा छूट से हिमाचल पटरी पर लौट आएगा?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz