जितनी जरूरत, उतना पानी

शिमला—चाबा से गुम्मा के लिए बन रही पेयजल स्कीम से शिमला शहर को जरूरत के हिसाब से ही पानी मिला करेगा। यह योजना खास गर्मियों के सीजन के लिए बनाई गई है क्योंकि उन दिनों में गुम्मा में पानी कम हो जाता है। लिहाजा सतलुज से वहां पानी डालकर शिमला की प्यास को बुझाया जा सकता है। पूरा ट्रायल होने के बाद जरूरत के हिसाब से गुम्मा संयंत्र में पानी डाला जाएगा। शिमला को पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अकेले चाबा योजना ही नहीं बल्कि गिरि से भी एक अन्य स्कीम सोची गई है। सूत्रों के अनुसार इस स्कीम पर भी काम शुरू हो रहा है, जिससे पहले यहां पर जमीन का अधिग्रहण जरूरी है। यहां जमीन अधिग्रहण के साथ कुछ अन्य मामले भी हैं जिनको सुलझाने के साथ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू हो जाएगा। यहां से भी गिरि योजना में पानी डाला जाएगा और वह पानी भी जरूरत के हिसाब से ही छोड़़ा जाएगा। शिमला के लिए सबसे बड़ी व्यवस्था वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट की होगी, जिसकी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम चल रहा है। यह योजना सीधे शिमला को आएगी, जिससे सतलुज का पानी यहां पहुंचाया जाएगा। इस स्कीम के निर्माण में सालों लगेंगे, जिससे पहले यहां चाबा स्कीम से वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट की औपचारिकताएं आखिरी चरण में हैं। इससे सालों तक राजधानी शिमला की दिक्कत दूर हो जाएगी। इतना ही नहीं इसमें सीवरेज प्रोजेक्ट भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल चाबा योजना से गुम्मा में पानी डालने की प्रक्रिया को लेकर ट्रायल चल रहा है और एक टैंक को भर लिया गया है। लंबी लाइन होने के चलते पानी को उठाने की कवायद चल रही है। शिमला शहर मंे गर्मियों के दिनों में पानी की काफी ज्यादा किल्लत हो जाती है। पिछले साल हुई किल्लत से सभी वाकिफ हैं परंतु इस साल ऐसी दिक्कत अभी तक पेश नहीं आई है। यहां पर पेयजल आपूर्ति का बेहतर संचालन किया जा रहा है। अब यदि गुम्मा में पानी की कमी हो जाए तो उसकी भरपाई चाबा से हो जाएगी और सतलुज का पानी यहां आएगा। यह पानी लोगों को जरूरत के हिसाब से ही मिलेगा, जिसे रोजाना की व्यवस्था से नहीं जोड़ा जाएगा। गुम्मा पेयजल योजना शिमला के लिए मुख्य पेयजल स्कीम है।

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