जेल अधीक्षक-उपाधीक्षक को डीजीपी डिस्क अवार्ड

नाहन—समाज सेवा की दिशा में गत कई वर्षों से कार्य कर रहे तथा विभिन्न संगीन अपराधों में सजायाफ्ता बंदियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने की दिशा में अहम कदम बढ़ा रहे केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन के जेल अधीक्षक व उपाधीक्षक जेल को डीजीपी डिस्क अवार्ड से सम्मानित किया गया है। प्रदेश की सबसे पुरानी व प्रदेश की दूसरी बड़ी जेलों में शुमार केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन केे जेल अधीक्षक जय गोपाल लोदटा व उपाधीक्षक जेल विकास भटनागर को डीजीपी डिस्क अवार्ड का सम्मान मिला है। हिमाचल प्रदेश कारागार एवं सुधारात्मक सेवाओं केे महानिदेशक सोमेश गोयल ने नाहन जेल के अधीक्षक व उपाधीक्षक के अलावा तीन अन्य कर्मचारियों मनसा राम, जितेंद्र शर्मा व नीम चंद को डीजीपी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। जानकारी के मुताबिक नाहन जेल के उपाधीक्षक विकास भटनागर व विनोद कुमार को वर्ष 2017 में डीजीपी डिस्क अवार्ड की घोषणा हुई थी। यह पुरस्कार सोमवार को जेल विभाग के एक समारोह में डीजीपी जेल सोमेश गोयल ने दिया। कंडा जेल में आयोजित जेल विभाग की राज्य स्तरीय वेलफेयर बैठक में नाहन जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों को यह पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। गौर हो कि केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि उत्तर भारत में मशहूर है। यहां पर गत कई वर्षों से बंदियों को जहां आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, वहीं उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल किए जाने को लेकर लगातार प्रयास हो रहे हैं। जेल अधीक्षक नाहन जय गोपाल लोदटा गत लंबे समय से केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन में सेवाएं दे रहे हैं। लोदटा को करीब 25 वर्ष की अवधी कारागार विभाग में सेवाएं देते हुए हो चुकी है, जबकि उपाधीक्षक नाहन जेल विकास भटनागर को 21 वर्ष का कार्यकाल जेल सेवाओं में हो चुका है। उधर केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन के अधीक्षक जेल जय गोपाल लोदटा व उपाधीक्षक विकास भटनागर ने बताया कि कारागार एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक सोमेश गोयल के मार्गदर्शन में सेंट्रल जेल नाहन में विभिन्न प्रकार की योजनाएं आरंभ की गई हैं।

रेडियो जॉकी कारागार की नई पहल

 केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन में गत वर्ष जेल विभाग के महानिदेशक सोमेश गोयल ने बंदियों के मनोरंजन व ज्ञान बढ़ाने के लिए कारागार में रेडियो जॉकी की शुरुआत की थी। रेडियो जॉकी में केंद्रीय आदर्श कारागार नाहन के बंदियों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया था। कारागार के प्रत्येक सैल को रेडियो जॉकी केे कनेक्शन से जोड़ा गया है तथा प्रतिदिन कारागार की किसी भी प्रकार की सूचना बंदी व उसके परिवार की सालगिरह, बच्चे का जन्मदिन व मनोरंजन के लिए अपनी पसंद के फरमाइश के गाने रेडियो जॉकी पर कारागार में सुनाए जाते हैं।

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