टमाटर लाएगा किसानों के अच्छे दिन 

नेरवा—उपमंडल चौपाल के नीचले क्षेत्रों के लोगों की आजीविका का मुख्य जरिया बन चुके टमाटर की इस साल बंपर फसल की उम्मीद की जा रही है। बीते साल मौसम की मार का दंश झेल चुके किसानों का इस साल मौसम ने भरपूर साथ दिया है। इस साल सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी से जहां जमीन में नमी बनी हुई है वहीं जल स्त्रोतों के पूरी तरह रिचार्ज होने से किसानों की सिंचाई की टेंशन भी खत्म हो गई है। इसके अलावा टमाटर की पनीरी लगाने के समय भी मौसम मेहरबान बना रहा। पनीरी लगाने के समय मौसम का साफ बना रहना आवश्यक होता है। किसानों ने जब पनीरी की बिजाई की थी उस समय भी पनीरी के उगने तक मौसम साफ बना रहा। यही नहीं किसानों ने जब पनीरी की रोपाई की तो समय समय पर बारिश होने से टमाटर के पौधों को संजीवनी मिलती रही। समय समय पर बारिश होते रहने से फसल के इस दौर में किसानों को सिंचाई के लिए भी ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ी क्योंकि बारिश से जमीन में पौधों के लिए पर्याप्त नमी बनी रही। इन दिनों किसान पौधों की पौराई करने के कार्य में जुटे हुए हैं एवं एक डेढ़ हफ्ते के बाद इन पौधों को सहारा देने के लिए टहनियां लगाने का काम शुरू हो जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जून के दूसरे पखवाड़े तक क्षेत्र में टमाटर सीजन पूरे शवाब पर आ जाएगा। उल्लेखनीय है कि सेब के बाद टमाटर उपमंडल के किसानों की आर्थिकी का दूसरा सबसे बड़ा साधन है। उपमंडल के नीचले क्षेत्रों में हजारों एकड़ जमीन पर टमाटर की खेती की जाती है। अधिकांश किसानों की पूरे साल की आजीविका टमाटर पर ही निर्भर है। स्थानीय किसानों के अलावा प्रवासी नेपाली भी टमाटर की खेती से काफी संख्या में जुड़े हुए हैं। इन नेपालियों ने स्थानीय किसानों से जमीनें लीज पर ली हुई है व इस जमीन में टमाटर लगा कर अपने परिवारों का भरण पोषण कर रहे हैं। टमाटर की खेती पूरी तरह मौसम पर ही निर्भर है। यदि पनीरी लगाने के समय अधिक बारिश हो जाए तो पनीरी के सड़ जाने का खतरा बना रहता है। इसी प्रकार यदि सर्दियों में बारिश बर्फबारी कम हो तो भी जमीन में नमी की कमी के चलते फसल के प्रभावित होने का खतरा रहता है। सबसे बड़ी बात है कि यदि क्षेत्र में टमाटर की फसल आने के बाद जून माह में यदि बारिश हो जाए तो यह सोने पर सुहागा वाली बात होती है। जून माह में बारिशें होने पर हरियाणा, पंजाब, यूपी आदि मैदानी इलाकों में टमाटर के सीजन पर पूर्णविराम लग जाता है जिस वजह से पहाड़ी लाल सोने की वैल्यू बढ़ने से इसके अच्छे दाम मिलते हैं। किसानों के लिए ऐसी सुखद स्थिति 2017 में बनी थी जब बारिश से मैदानी क्षेत्रों में टमाटर सीजन करीब तीन हफ्ते पहले ही समाप्त हो गया था। इस साल किसानों को पहाड़ी टमाटर के दाम डेढ़ हजार रुपए प्रति क्रेट से भी अधिक मिले थे। बहरहाल अब तक मौसम के मेहरबान बने रहने से इस साल न केवल टमाटर की बंपर फसल की उम्मीद की जा रही है बल्कि इसके अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बनती दिख रही है।

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