टीचर गायब, होस्टल में छात्र ही रह गए

शिमला  —प्रदेश में ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। शिमला के घणाहट्टी क्षेत्र में चल रहे संबंधित योजना के तहत इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ एजुकेशन के तहत  ईएमटी और बीबीटी कोर्स चलाया जा रहा था, उसमें गोलमाल सामने आया है। इस केस पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश प्रदेश सरकार को जारी किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक अपोलो मेडिस्किल्स लिमिटेड के तहत सातवें बैच के ईएमटी का कोर्स करवाया जा रहा था, लेकिन अब होस्टल में मात्र छात्र ही अकेले रह गए हैं। वे खुद ही खाना पका रहे हैं और रोज इस इंतजार में कक्षाओं में बैठ जाते हैं कि कोई शिक्षक उन्हें कोर्स पूरा करवाने आ जाएगा।  छात्रों का कहना है कि फरवरी से उन्हें पढ़ाने वाला भी कोई भी शिक्षक संस्थान नहीं आ रहा है। सरकार की इस योजना में छात्रों का होस्टल में निःशुल्क रहना था, लेकिन अब छात्र अपने खर्चे से खाना बना रहे हैं और कोर्स को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।  बताया जा रहा है कि इस संस्थान में दिसंबर में ईएमटी का सातवां बैच बिठाया गया था, लेकिन फरवरी माह में छात्रों को घर जाने के लिए बोल दिया गया और कहा गया कि वह अब तब ही संस्थान में आएं, जब उन्हें बुलाया जाए। ऐसे में जब काफी समय तक कॉल नहीं आई तो छात्र संस्थान में आ गए। वहीं, होस्टल में सुरक्षा कर्मियों ने कहा कि छात्रों को होस्टल से निकालने के आदेश हैं। इस बात से परेशान छात्र संबंधित अधिकारियों को कॉल करते रहे। छात्रों में नितेश, शिवा और पूनम आदि ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की है। इस पर आगामी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस शिकायत को सचिवालय तक भी पहुंचाया गया है।

ये उठे हैं सवाल

जब यह बैच चलाना ही नहीं था तो छात्रों को संस्थान ने प्रवेश क्यों दिलवाया गया? भले ही यह कोर्स निःशुल्क था, लेकिन फिर भी छात्रों को अपने जेबें ढील करके खाना खाना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। बीच कोर्स में ही छात्रों को घर जाने के लिए क्यों बोला गया?

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