डीसी ऑफिस की सहमति से आए थे कांग्रेसी

डीएसपी ने दिया नोटिस का जवाब, कठघरे में खड़े किए निर्वाचन अधिकारी संदीप कुमार

शिमला –कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल के नामांकन की चाय की चुस्कियां डीसी कांगड़ा संदीप कुमार के गले की फांस बन गई हैं। डीएसपी बलवीर जम्वाल ने नोटिस के जवाब में जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप कुमार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। डीएसपी ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि नामांकन के दौरान डीसी की अनुमति के बिना 15 लोग भीतर कैसे आ सकते थे? उन्हें डीसी ऑफिस में चाय सर्व की जा रही थी।  इस दौरान एसडीएम धर्मशाला तथा डीसी ऑफिस के कर्मचारी खातिरदारी में जुटे थे। इस कारण डीसी ऑफिस की सहमति से भीतर आए लोगों को डीएसपी कैसे बाहर खदेड़ सकता था? बताते चलें कि सोमवार को कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल के नामांकन के दौरान डीसी धर्मशाला के ऑफिस में 15 लोग भीतर आ गए थे। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार 100 मीटर के दायरे में पांच लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने डीएसपी से पूछा है कि उन्होंने डीसी ऑफिस के भीतर निर्धारित संख्या से ज्यादा आ रहे कांग्रेस नेताओं को क्यों नहीं रोका? क्यों न डीएसपी के खिलाफ इस कोताही पर कड़ी कार्रवाई की जाए? रोचक है कि डीएसपी ने जिला निर्वाचन अधिकारी के इस नोटिस के जवाब में जबरदस्त पलटवार किया है। उन्होंने नोटिस के जवाब की प्रति केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश को भी भेजी है। अपने जवाब में डीएसपी ने साफ कहा है कि डीसी ऑफिस में कांग्रेसियों का प्रवेश उपायुक्त कार्यालय की सहमति से हुआ है। इस संदर्भ में डीएसपी ने चुनाव आयोग को पांच वीडियो फुटेज भी भेजी हैं। इसमें साफ दिख रहा है कि एक प्रशासनिक अधिकारी कांग्रेसियों के साथ ऑफिस के भीतर आ रहा है।

आयोग के पास एक अन्य शिकायत भी आई

मामले में चुनाव आयोग को एक अन्य शिकायत प्राप्त हुई है। इसमें कहा गया है कि डीसी ऑफिस में 10 से 15 कांग्रेसी मौजूद थे। इसी दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग का ऑब्जर्वर डीसी के ऑफिस में पहुंच गया। इसके तुरंत बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह मामला राज्य निर्वाचन अधिकारी के ध्यान में लाया। इसके बाद डीएसपी को नोटिस जारी किया।

जांच उच्च अधिकारी को सौंपने की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दिए हैं। इस आधार पर चुनाव आयोग मंडलायुक्त विकास लाबरू से जांच रिपोर्ट तलब कर सकता है। जाहिर है कि मामले में डीसी ने डीएसपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अब नोटिस के जवाब के बाद खुद निर्वाचन अधिकारी कटघरे में आ गए हैं। इस कारण अब मामले की जांच उच्चाधिकारी को सौंपने की तैयारी है।

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