डेढ़ गुना ज्यादा होगा रेशम का उत्पादन

बम्म—रेशम कीट पालन केंद्र रांगडू (लद्दा) में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष डेढ़ गुना उत्पादन होने का अनुमान है। कीट पालन के चौथे चरण का कार्य लगभग पूरा होने वाला है, वहीं किसान दस मई तक रेशम कोकून को सुखाकर बिक्री के लिए तैयार कर लेंगे। रेशम कीट पालन का कार्य चार चरणों में किया गया है, जो कि 18 से 23 फरवरी व 28 फरवरी से चार मार्च को शुरू हुआ, जिसमें किसानों को रेशम कीट पालने के लिए वितरित किए गए। इस सजीन में रेशम कीट पालकों का आंकड़ा 400 के पार है। गनीमत यह रही कि इस बार कोई भी बीमारी कीट को नहीं लगी। किसानों को निःशुल्क दवाइयां व देखरेख कर्मचारियों द्वारा घरद्वार उपलब्ध करवाई गई थी, वहीं शहतूत के पत्ते भी केंद्र मुफ्ट करवाता है। 20 से 22 दिन की कड़ी मेहनत करने पर किसानों पांच से दस रुपए के बीज से उन्हें पांच से 40 हजार रुपए तक का लाभ मिलेगा। किसानों को नर्सरी से उत्तम किस्म के शहतूत पौधे निःशुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। किसानों को रेशम कीट पालन कीट, प्रशिक्षण व दवाइयां मुफ्त दी जा रही है। रेशम कीट पालन केंद्र रांगडू के प्रभारी ब्रजलाल ने बताया कि किसानों व कर्मचारियों की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि इस बार बंपर पैदावार होगी। केंद्र के तहत तल्याणा, भलस्वाय, कुठेड़ा, मोरसिंघी, सलाओं, हटवाड़ व कोट पंचायतों के लगभग 500 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। यहां विभाग के पास करीब 74 बीघा भूमि में शहतूत के 4500 पौधे व नर्सरी है। यह जीरो बजट खेती वाला व्यवसाय है, जिसे आवारा पशुओं, ओलावृष्टि व तूफान का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि रेशम कीट पालन का कार्य अंतिम दौर में है। ब्रजलाल ने बताया कि इस सत्र में 30 क्विंटल कोकून उत्पादन होने का अनुमान है। विभाग द्वारा तय किए गए मानकों के अनुरूप ही निजी कंपनी द्वारा किसानों का रेशम कोकून खरीदा जाएगा। मूल्य की वृद्धि ए, बी, सी व डी गे्रड में 700 से 1300 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा।

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