तप और आत्मविश्वास के बल पर जगन बने मुख्यमंत्री

 

तप और आत्मविश्वास के बल पर जगन बने मुख्यमंत्री

हैदराबाद- दस वर्ष तक के कड़े संघर्ष और तप का फल आखिरकार येदुगुड़ी संदिति जगन मोहन रेड्डी को गुरुवार को तब मिला जब उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।पिता वाई. एस. राजशेखर रेड्डी की दो सितंबर 2009 को हेलिकाप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद जगन रेड्डी ने राज्य की सत्ता के शिखर पहुंचने के लिए लंबा संघर्ष किया। इस दौरान वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल भी गये लेकिन उन्होंने मनोबल टूटने नहीं दिया और संघर्ष जारी रहा। श्री जगन रेड्डी के एक दशक के तप और आत्म विश्वास का ही नतीजा रहा कि हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में उन्होंने एन. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) को न केवल बुरी तरह पराजित किया बल्कि उसका करीब-करीब सूपड़ा साफ कर दिया। सत्रहवीं लोकसभा के लिए राज्य की 25 संसदीय सीटों पर भी जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी ने तेदेपा को करारी शिकस्त दी और 22 सीटों पर कब्जा जमाया। इक्कीस दिसंबर 1972 को जन्मे जगन रेड्डी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता की जब मृत्यु हुई तो उस समय वह अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। जगन रेड्डी की प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद पब्लिक स्कूल में हुई और उन्होंने बी. काम की स्नातक डिग्री प्रगति महाविद्यालय से ग्रहण की। उनकी पत्नी गृहिणी हैं, उनके दो बेटियां हैं जो लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। पिता के जीवित रहते ही जगन रेड्डी ने 2004 में राजनीति में कदम रखा और अविभाजित आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। वह 2009 के आम चुनाव में राज्य की कड़प्पा संसदीय सीट से सांसद चुने गये और लोकसभा पहुंचे। जीवन में आई यह खुशी ज्यादा दिन नहीं रह पाई और मुख्यमंत्री पिता राजशेखर रेड्डी की दो सितंबर 2009 में हेलिकाप्टर दुर्घटना में मौत हो गयी। पिता की मौत के बाद मुख्यमंत्री पद की इच्छा पाले जगन को कांग्रेस से सहयोग नहीं मिला। पिता की मृत्यु के बाद कांग्रेस से समर्थन नहीं मिलने और अपनी राजनीतिक धरोहर को मजबूत और सुरक्षित रखने के लिए जगन ने नौ अप्रैल 2010 से “ऊड़ारुप यात्रा” प्रारंभ की जिसका कांग्रेस हाई कमान और स्थानीय नेताओं ने खासा विरोध किया। उनसे इस यात्रा को रोकने के लिए कहा गया। जगन ने अपनी मां वाई. एस. विजया लक्ष्मी के साथ उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की लेकिन उन्हें यात्रा जारी रखने की अनुमति नहीं मिली।इसके बाद जगन ने अपनी राजनीति का रास्ता अलग चुन लिया। उन्होंने 29 नवंबर 2010 को कांग्रेस के साथ ही लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और अपनी यात्रा जारी रखी जिससे राज्य में उनकी लोकप्रियता बढ़ी। मई 2011 में कड़प्पा संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में 5.4 लाख वोटों के भारी अंतर से जीतकर फिर लोकसभा की ड्योढ़ी पार किया।राज्य में लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही जगन का मनोबल भी बढ़ता गया और 11 मार्च 2011 को उन्होंने युवजन श्रमिक रायतु कांग्रेस पार्टी का गठन किया। पूर्वी गोदावरी जिले में पार्टी का गठन करने के बाद अगले दिन जगन में अपने स्वर्गीय पिता वाई एस आर के स्मारक पर जाकर अपने दल का झंडा फहराया। जगन की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही राज्य की राजनीति में उनके विरोधियों की व्याकुलता बढ़ती गई और 25 मई 2012 को उन्हें सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उन्हें हैदराबाद की चेनचिलगुडा जेल में डाल दिया गया और वह 16 माह तक कैद रहे। 

विभाजित आंध्र प्रदेश की विधानसभा के 2014 में हुए पहले चुनाव में जगन की पार्टी 175 में से केवल 66 सीट पर ही जीत हासिल कर चुकी। राज्य में एन. चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में तेदेपा की सरकार बनी और जगन ने विपक्ष के नेता की हैसियत से पांच साल तक राज्य सरकार की असफलता और भ्रष्टाचार के लिए घेरने का कोई मौका नहीं गंवाया। 

यही नहीं जगन ने इस दौरान अपने विरुद्ध लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का भी माकूल जबाव दिया। इसी संघर्ष के दौरान तेदेपा ने जगन को तगड़ा झटका दिया और पार्टी के 23 विधायकों और तीन सांसदों को तोड़ अपने साथ मिला लिया। मजेदार बात यह है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में तेदेपा 23 सीटों पर ही सिमट गई और उसके केवल तीन सांसद ही जीत हासिल करने में सफल हो सके। जगन ने इन परिणामों को लेकर श्री नायडू पर व्यंग्य भी कसा और जितने सांसद और विधायक तोड़े गए उतने पर ही तेदेपा सिमट कर रह गई। 

जगन के राजनीतिक जीवन की सफलता में उनकी 341 दिनों के दौरान राज्य के सभी 13 जिलों में की गई 3648 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने छह नवंबर 2017 को यह पदयात्रा शुरू की और 10 जनवरी 2019 को कड़प्पा जिले में अपने पिता की स्मारक पर खत्म की। पदयात्रा में जगन को राज्य की जनता का बड़ा समर्थन देखने को मिला। 

दस वर्ष के इस लंबे तप में 25 अक्टूबर 2018 को विशाखापत्तनम हवाई अड्डे के कैफेटेरिया में वहां काम करने वाले एक वेटर ने तेजधार वाले हथियार से हमला कर घायल कर दिया लेकिन नसीब के धनी जगन इस हादसे में बच गये।

भारती सीमेंट्स और ऊर्जा परियोजनाओं समेत कई उद्योगों के मालिक जगन की राजनीति में उनके तेलगू समाचार पत्र साक्षी और समाचार टेलीविजन की राजनीति लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका रही। वर्ष 2018 में जगन की पार्टी ने राजनीतिक रणनीति के महारथी प्रशांत किशोर की भी सेवायें लेनी शुरू कर दी और 2019 में राज्य विधानसभा की 175 सीटों में से 151 और लोकसभा की 25 में से 22 सीटें जीतकर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया और आज राज्य की सत्ता के शिखर पर पहुंचते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

 

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