तालाबंदी की कगार पर किचन एप्लायसेंस उद्योग

बीआईएस लाइसेंस की अनिवार्यता ने बढ़ाई मुश्किलें, 22 दिन से ठप है उत्पादन

बीबीएन – बीआईएस लाइसेंस अनिवार्यता की शर्त ने हिमाचल सहित देश भर के सैकड़ों किचन एप्लायंसेस उद्योगों को तालांबदी की कगार पर पहुंचा दिया है। हालात यह हैं कि बीआईएस लाइसेंस लेने की मियाद समाप्त हो चुकी है और गिने-चुने उद्योगों को ही लाइसेंस मिल पाया है। ऐसे में लाइसेंस न होने से इन उद्योगों में उत्पादन पूरी तरह से ठप पड़ गया है। यही नहीं, जिन्हें लाइसेंस मिले भी थे, उनके उत्पाद लैब परीक्षण में अधोमानक पाए जाने के बाद उन उद्योगों में भी उत्पादन रोक दिया गया है। नतीजतन जहां लाइसेंस न होने की सूरत में उद्योगपतियों को उत्पादन बंद रहने से करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं हजारों कामगारों पर भी नौकरी छिनने का संकट मंडरा रहा है। बताते चलें डीआईपीपी ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के तहत किचन एप्लायंसेस उद्योगों के लिए बीआईएस अनिवार्य कर दिया है, उक्त उद्योगों को पहली मई से पूर्व तय अवधि में यह लाइसेंस लेना था, लेकिन कम समय और लाइसेंस लेने की जटिल प्रक्रिया की वजह से ज्यादातर उद्योग इसे नहीं ले पाए, जिसके चलते अब उद्योगों में लाइसेंस के अभाव में उत्पादन ठप हो गया है। उद्योगपतियों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से इस संबंध में गुहार लगाते हुए लाइसेंस लेने की मियाद छह माह आगे बढ़ाने की मांग की है।  उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष आठ नवंबर को उद्योग नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने  गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के तहत किचन एप्लायंसेस मसलन जूसर, मिक्सर ग्राइंडर, फूड प्रोसेसर और हैंड ब्लेंडर के उत्पादन के लिए पहली मई, 2019 से बीआईएस लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक देश भर में इस श्रेणी के 200 से ज्यादा और हिमाचल में 50 से ज्यादा उद्योग हैं, जिन्होंने डीआईपीपी के आदेशों के अनुरूप पहली मई से पूर्व लाईसेंस के लिए आवेदन कर दिया है, लेकिन इनमें से देश भर में मात्र 47 व प्रदेश के तीन उद्योगों को ही लाइसेंस मिल सका है, जबकि बाकी निमाता लाइसेंस लेने की लंबी व जटिल प्रक्रिया की वजह से अधर में लटके हुए हैं।

केंद्र-प्रदेश सरकार करे हस्तक्षेप

बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल व महासचिव वाईएस गुलेरिया ने बताया कि 30 अप्रैल को लाइसेंस लेने की डेडलाइन समाप्त हो गई है, ऐसे में प्रदेश के अधिकांश उद्योगों लाइसेंस के अभाव में बंद करने के सिबाय कोई विकल्प नहीं बचा है। संघ ने प्रदेश व केंद्र सरकार सहित उद्योग विभाग, डीआईपीपी व बीआईएस का दरवाजा भी राहत के लिए खटखटाया है।

लाइसेंस प्रक्रिया लंबी, जटिल

उपकरण निर्माताओं का कहना है कि बीआईएस लाइसेंस लेने की प्रक्रिया लंबी व जटिल है। लाइसेंस के लिए विनिर्माण इकाइयों में एसटीआई के अनुसार विभिन्न उपकरणों की व्यवस्था करनी होती है और प्रमाणन के लिए आवेदन करने से पहले बीआईएस अनुमोदित प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भी जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में चार से पांच महीने का समय लगता है, जबकि डीआईपीपी द्वारा दी गई गई मियाद मात्र साढ़े पांच माह की थी। ऐसे में सभी निर्माताओं द्वारा इतने कम समय के भीतर बीआईएस लाइसेंस प्राप्त करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं।

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