तीन महीने से नहीं मिली सैलरी

प्रदेश के 2000 वोकेशनल ट्रेनर काट रहे दफ्तरों के चक्कर

शिमला – महंगाई के इस दौर में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे 2000 वोकेशनल ट्रेनर्ज को तीन माह से सैलरी नहीं मिल पाई है। इस वजह से वोकेशनल ट्रेनर्ज के घर का बजट तक बिगड़ गया है। ऐसे में ये वोकेशनल ट्रेनर्ज वेतन के लिए बार-बार सरकार व एसएसए के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें विभाग से आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिल रहा है। जानकारी के अनुसार फरवरी माह से इन शिक्षकों का वेतन पैंडिंग है। सूत्रों की मानें तो कंपनी और विभाग के बीच हुए एमओेयू के तहत कंपनी के पास शिक्षकों को तीन महिने का वेतन देने के लिए फंड उपलब्ध होना चाहिए, ताकि बजट न आने की स्थिति में शिक्षकों का वेतन जारी रखा जाए। जानकारी के अनुसार एसएसए के पास वोकेशनल ट्रेनर्ज को देने के लिए बजट नहीं बचा है। गौर हो कि इस समय प्रदेश में 20 कंपनियों के माध्यम स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा दी जा रही है। इसके तहत स्कूलों में 11 वोकेशनल ट्रेड पढ़ाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि एमएचआरडी से वोकेशनल शिक्षा के लिए पिछला बजट नहीं आया है। इस कारण विभाग द्वारा कंपनी को यह बजट नहीं दिया गया है। ऐसे में वोकेशनल टेनर्ज का वेतन प्रभावित हुआ है। हालांकि इस पूरे मामले पर एसएसए के परियोजना निदेशक आशीष कोहली का कहना है कि केंद्र से इसके लिए बजट नहीं आ रहा था, जिस कारण इन शिक्षकों का वेतन पेंडिंग था। उन्होंने कहा है कि अब केंद्र से इसके लिए बजट भेजा गया है। ऐसे में कंपनियों को जल्द बजट जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद कंपनियां शिक्षकों का वेतन देंगी कंपनियों को वोकेशनल ट्रेनर्ज का तीन माह का वेतन शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे।

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