दफ्तरों में फ्री दवाआें की लिस्ट नहीं

हाई कोर्ट के आदेशों का सभी कार्यालय नहीं कर रहे पालन

शिमला —हर सरकारी कार्यालयों के बाहर फ्री दवाआें की लिस्ट नहीं लग पाई है। जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया था। देखा जा रहा है कि सभी कार्यालय निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। पहले जिला सीएमओ, बीएमओ और पंचायत प्रधान के  अंतर्गत यह लिस्ट पंचायत घरों के नोटिस बोर्ड पर लगाए जाने के आदेश थे। सरकारी कार्यालयों में इस लिस्ट को लगाने की जिम्मेदारी विभाग के निदेशक को भी सौंपी गई थी, लेकिन अब गिने-चुने कार्यालयों में ही यह लिस्ट देखी जा रही है। गौर हो कि यह लिस्ट पहले अस्पतालों के बाहर लगाई जाती थी, लेकिन निःशुल्क मिलने वाली दवाआें की जानकारी आज जनता को आसानी से मिले, इसके लिए हर ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर यह सूची लगाई जानी तय की गई थी। अस्पतालों में प्रदेश सरकार 330 जीवनरक्षक दवाएं निःशुल्क दे रही है। ये दवाएं जिला अस्पतालों में दी जा रही हैं। सीएचसी और पीएचसी में मिलने वाली 210 दवाआें की लिस्ट ऑफिस के बाहर लगाई जानी तय की गई थी। हालांकि कुछ अस्पतालों के बाहर भी ये लिस्ट नहीं लग पाई है। फिलहाल इस अभियान के तहत यह भी तय किया गया था कि किस जिला के अस्पताल में कौन सी दवा उपलब्ध है और कौन सी दवा नहीं है, इसके पूरे ब्यौरे के साथ लिस्ट हर ऑफिस के बाहर लगवाई जानी थी। प्रतिदिन इस लिस्ट की चैक भी किया जाना था। इसकी जिम्मेदारी कार्यालय के हैड, सीएमओ और पंचायत सदस्य क ी होनी थी। हालांकि पंचायत घरों में आयोजित होने वाली ग्राम सभाआें में भी इन दवाआें की उपलब्धता के बारे में बताया जाना तय किया गया था। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 30 दिन के अंदर प्रदेश की सभी कार्यालयों में दवाआें की लिस्ट लगाने की प्रकिया को पूरा करने का काम किया जाने वाला था, लेकिन ये लिस्ट सभी जगह अब नहीं दिख रही है।

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