दियोटसिद्ध में सुविधाओं को तरस रहे भक्त

बड़सर—जिला हमीरपुर के उपमंडल बड़सर में स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध दुनिया भर में शुमार होने के बावजूद पर्यटन की दृष्टि से पिछड़ रहा है। उत्तर भारत का प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर अरसे बाद भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया है। हालांकि संभावनाएं अपार हैं, लेकिन यहां पंहुचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को वे तमाम सुविधाएं नहीं मिल पा रही है, जो कि एक पर्यटन स्थल पर मिलनी चाहिएं। बाबा की नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए अभी तक सही ढंग से पार्किंग स्थल तक नहीं बन पाया है। मंदिर में आने वाले सड़क मार्ग भी तंग है तथा इनकी हालत भी कुछ खास नहीं है। सड़कों की व्यवस्था में सुधार न होने से इससे पहले कई दुर्घटनाएं भी पेश आ चुकी हैं। बावजूद इसके  दियोटसिद्ध मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। हर वर्ष करोड़ों रुपए का चढ़ावा श्रद्धालुओं से मंदिर न्यास को प्राप्त होता आ रहा है। यदि मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे का सही प्रयोग हो तो मंदिर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। हर बार सरकार परिवर्तन होने या नई सरकार बनने पर मंदिर न्यास का गठन मंदिर विकास के लिए किया जाता है। बावजूद इसके श्रद्धालुओं की सुविधाओं में इजाफा नहीं हो पाया है। बाबा की नगर को जोड़ने वाले सड़क मार्गों की हालत दयनीय है। हालांकि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए न्यास निधि से हैंडपंपों की स्थापना की गई है, लेकिन अधिकांश हैंडपंप उन स्थानों पर स्थापित है, जहां श्रद्धालु इनका प्रयोग तक नहीं कर पाते है। वैसे तो सालभर श्रद्धालुओं का मंदिर में आना जाना चला रहता है, लेकिन गर्मियों के आगाज के साथ ही शुरू होने वाले चाला मेलों के दौरान बाहरी राज्यों से श्रद्धालु ऊना, बड़सर, शाहतलाई, ज्वालाजी, नदौन, गलोड़, सलौनी व बिझड़ी चकमोह से होते हुए दियोटसिद्ध पंहुचते हैं, लेकिन यदि श्रद्धालु रास्ते में रुककर कहीं आराम करना चाहें तो उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती है। इस कारण उन्हें बाजारों में रुकना पड़ता है। बाजारों में श्रद्धालुओं को गाडि़यां खड़ी करने के लिए भी सुविधा नहीं मिल पाती है। बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि मंदिर न्यास श्रद्धालुओं को हर सुविधा देने के प्रयास तो करता रहा है लेकिन न्यास के ये प्रयास नामात्र साबित हो रहे हैं। यदि सरकार व धार्मिक नगरी दियोटसिद्ध मंदिर न्यास मिलकर प्रयास करंे और मंदिर को जोड़ने वाली सड़कों, वाहन पार्किंग व अन्य मूलभुत सुविधाओं पर मिलकर कार्य करंे तो बाबा की नगरी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है।

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