दिल्ली से भी महंगा मनाली-रोहतांग पहुंचना

परमिट हासिल करने वाले वाहन चालक सैलानियों से वसूल रहे दोगुना भाड़ा

मनाली – रोहतांग दर्रे की तरफ जाने वाले वाहनों के दस्तावेज जांचने के लिए जहां जिला प्रशासन ने कोठी में दूसरा बैरियर भी स्थापित कर दिया है, वहीं एनजीटी के आदेशों पर सख्ती बरते हुए अब रोहतांग जाना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन की सख्ती के बाद जहां परमिट वाले वाहन ही दर्रे की तरफ जा पा रहे हैं, वहीं रोहतांग को देखने की चाह लिए मनाली पहुंच रहे सैलानियों को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए जेब भी ढीली करनी पड़ रही है। एनजीटी के आदेशों पर जहां इस बार 1300 वाहनों को रोहतांग परमिट रोजाना जारी किया जा रहा है, वहीं परमिट हासिल करने वाले वाहन चालक सैलानियों से मुंह मांगा किराया वसूल रहे हैं।  पहले जहां मनाली से रोहतांग के लिए टैक्सी 3500 से लेकर 16 हजार तक उपलब्ध होती थी, वहीं अब यह दाम इस बार आठ हजार से शुरू होकर 28 हजार तक पहुंच चुके हैं। लिहाजा टैक्सी चालकों द्वारा बढ़ाया गया किराया सैलानियों पर ही नहीं घाटी के टूअर एंड ट्रैवल   करोबारियों पर भी भारी पड़ा है।   कारोबारियों का कहना है कि जो पैकेज उन्होंने सैलानियों को दो माह पहले दिया था, उस पैकेज का सारा तालमेल ही टैक्सियों का किराया बढ़ने से बिगड़ गया है। ऐसे में उन्हें भी कारोबार में नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि टैक्सियों का किराया बढ़ाया जाने की सूचना प्रशासन के पास नहीं है, लेकिन अगर किराया बढ़ाया गया है, तो इस बारे में टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों से बात की जाएगी।  पहली जून से रोहतांग दर्रे को सैलानियों के लिए बहाल किया जाना है। ऐसे में एक तरफ रोहतांग देखने की चाह, तो दूसरी तरफ ट्रैक्सियों के किराए में की गई बढ़ोतरी सैलानियों के लिए आफत बन गई है।   सैलानियों का कहना है कि दिल्ली से मनाली पहुंचने में इतने पैसे खर्च नहींहुए, जितने मनाली से रोहतांग जाने का किराया चुकाना पड़ रहा है।   उपायुक्त कुल्लू यूनुस का कहना है कि रोहतांग जाने के लिए टैक्सी आपरेटरों द्वारा किराया बढ़ाए जाने की प्रशासन को सूचना नहीं है। इस संबंध में टैक्सी आपरेटरों से बात की जाएगी। वहीं, प्रशासन ने बिना परमिट 100 गाडि़यां की ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

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