दिल में होनी चाहिए भक्ति

ऊना में बही ज्ञान की गंगा,परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को किया निहाल

ऊना –घर का दिया जलता हो तो चोर चोरी करने नहीं आते। उन्हें पता है कि कोई जाग रहा होगा। इसी प्रकार हृदय में सदैव भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का दीपक जला कर रखना चाहिए, तभी हम जगत के प्रपंच से बच सकते हैं। संसार में हम फूलों की खेती करें, कांटों की नहीं। कुछ लोग जाने-अनजाने अपने कर्म से कांटे उगा बैठते हैं। जीवन उसका महकता है जो परमार्थ के मार्ग पर चलता है। परमार्थ के रास्ते पर चलना फूलों की खेती करने जैसा है। उक्त ज्ञानसूत्र श्रीराम कथा के सप्तम दिवस में परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने शिव मंदिर, बढेड़ा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ध्यान और प्रार्थना में अंतर है। ध्यान मंे आत्म उपलब्धि है। ध्यान सम्राट होने जैसा है। जबकि प्रार्थना में मांग छिपी होती है। हम भगवान से कुछ याचना करते हैं। प्रार्थना भी सम्राट बना सकती है अगर हम प्रभु से मांगें कुछ नहीं केवल उन्हें धन्यवाद दें। जीवन में ईश्वर से शिकायत करने की प्रवृत्ति भक्ति का उत्तम लक्षण नहीं है। अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि परमात्मा को खुश नहीं किया जा सकता। जिसे दुखी नहीं किया जा सकता उसे खुश भी करने का कोई उपाय नहीं है। ईश्वर की प्रसन्नता मनुष्य पर निर्भर नहीं है। भगवान सदैव प्रसन्न ही रहते हैं। आज कथा में देवी सीता का गंगा पूजन एवं तीर्थराज प्रयाग की महिमा का वर्णन, भगवान श्रीराम के वियोग में चक्रवर्ती नरेश महाराज दशरथ का निधन, भरत जी का प्रभु श्रीराम को अयोध्या लौटाने के लिए चित्रकूट जाने का प्रसंग, श्रीरामजी का पंचवटी निवास, रावण द्वारा सीता माता का हरण, जटायु उद्धार एवं शबरी माता का चरित्र सभी ने अत्यंत श्रद्धा से सुना। इस अवसर पर अनेक मनोरम झांकियां भी निकाली गईं। कथा में सर्वश्री प्रवीण धीमान, अश्विनी लंबड़, राम किसन, दीपक ठाकुर, विक्कू ठाकुर, अवतार सिंह, रवि ठाकुर, राजेश राणा, पंकज राणा, सुदर्शन ठाकुर, अरविंद शर्मा, विजय कुमार, पं हरिकिशन शर्मा, रामकुमार, विक्की राणा, मलकीयत सिंह, सुखविंद्र, रोहित राणा, बलकार सिंह, संदीप ठाकुर, राजिंद्र सिंह, अक्षय राणा, रोमन ठाकुर, विशाल ठाकुर, रोहित ठाकुर, मेजर सिंह, कश्मीर सिंह, नरेंद्र राणा, रविंद्र ठाकुर, रवि धीमान, गौरव राणा, अमन राणा, सक्षम ठाकुर सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

 

 

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