‘दिव्य हिमाचल’ के मंच पर सात सुरों का संगम

92 प्रतिभागियों ने सुरीले तरानों से बांधा समां

बिलासपुर—भाषा एवं संस्कृति विभाग बिलासपुर का ऑडिटोरियम ‘दिव्य हिमाचल’ के लोक प्रिय इवेंट ‘हिमाचल की आवाज’ का गवाह बना। मंच पर हिमाचल की आवाज 2019 में प्रस्तुति देने आए प्रतिभागियों ने अनेक रंग बिखेरे। इसमें जूनियर से लेकर सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर मन मोहा।  इसमें आठ साल के बच्चे से लेकर 38 साल के 92 प्रतिभागियों ने अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा। ऑडिशन में प्रतिभागियों ने हिंदी, पहाड़ी तथा पंजाबी गानों का तड़का लगाया। जूनियर व सीनियर दो वर्गों में आयोजित इस प्रतियोगिता में जहां नौनिहालों ने अपनी मखमली आवाज का जादू बिखेरा। ऑडिशन में ग्लोरी स्कूल से पंहुचे नन्हें प्रतिभागी पारस (नौ साल) ने अपनी सुरीली आवाज से गीत गाकर लोगों का मन जीता। एंकर व जज के पूछने पर पारस ने बताया कि उसने अपनी मां से गाना सीखा है। वहीं, ऑन दि स्पॉट भी दर्जनों प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाकर संगीत के मंच पर अपना हुनर दिखाया। शाम चार बजे तक पंजीकरण का दौर चलता रहा। ऑडिशन में डा. जय कुमार शर्मा, राजकुमार गौतम, समीला ठाकुर व संजीव ठाकुर जजमेंट पैनल के सदस्य रहे। जज डा. जय कुमार शर्मा ने ऑडिशन के पहले जूनियर प्रतिभागी पारस को टैग लगाकर कार्यक्रम का आगाज किया। इसके बाद सुरों का संग्राम शुरू हो गया। ऑडिशन में कैहलूर भोजनालय बिलासपुर के संचालक दिनेश कुमार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कहलूर में छिड़ी सुरों की जंग

घुमारवीं—कहलूर की धरा पर शुक्रवार को सुरों की जंग छिड़ी। अग्रणी मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ के मेगा इवेंट ‘हिमाचल की आवाज’ में  जिला भर से पहुंचे जूनियर-सीनियर 92 फनकारों ने सुरीली आवाज में गीतों की झड़ी लगाकर समां बांधा। वन से लेकर नाइनेंटी टू टैग तक बच्चों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। पारस ने ए मेरे वतन के लोगों, अक्षित ने तेरा मेरा अफसाना, सरण्य ने मेरे प्यारे वतन, अंश ने गुलाबी आंखंे तेरी, आदर्श ने तेरे यार बथेरे, अभिमन्यु ने अल्लाह बारियां, श्रेया ने मां मेरी मां, शिवम ने जीना कैसे जीना, समक्ता ने जिंदगी में अगर व जिया ने सनम-रे-सनम। आदित्य ने आदमी खिलौना है, विग्नेश ने तेरे यार बथेरे, सान्या ने तेरे बिन नहीं लगदा, सृष्टि ने किस्मतों का लिखा, शगुन ने सोहणां नजारा भवनां दा, वंशिका ने फूलों वाले रंग, मेहर ने महक रातां, आस्था ने बाबा मैं तेरी मल्लिका, आदर्श ने कच्ची डोरियां व अंशुल ने अल्लाह बारियां प्रस्तुत किया। अभ्युदय ने शिव कैलाशों के वासी, क्षबी ने तुमसे ज्यादा मैं नूं जानूं, अराध्या ने गुलाबी आंखें तेरी हो गई, चारू ने ओ कान्हा, अपूर्वा ने चलते-फिरते, देवन ने जरा याद करो कुर्बानी, प्रतिभा ने सलाम उन जवानों को तथा शिवांश ने जीना-जीना गीत सुनाया।

सभी प्रतिभागियों को दिए प्रमाण पत्र

सभी प्रतिभागियों को ‘दिव्य हिमाचल’ की तरफ से प्रमाण पत्र दिए गए। ऑडिशन में चयनित होने वाले प्रतिभागियों का आगामी चरण में प्रवेश होगा। फिलहाल ऑडिशन में प्रतिभागियों ने कमाल का प्रदर्शन कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

बच्चों  के साथ अभिभावक भी आए साथ

जुखाला – प्रदेश के नंबर-1 मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ द्वारा आयोजित हिमाचल की आवाज का कारवां शुक्रवार को बिलासपुर शहर पहुंचा। बिलासपुर शहर में जिला भाषा विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित ऑडिशन में सैकड़ों प्रतिभागियों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। इस ऑडिशन में बच्चों के साथ-साथ सीनियर वर्ग में कई महिलाओं ने भी भाग लिया। मंच को लेकर बच्चों के साथ साथ महिलाओ में भी भारी उत्साह देखने को मिला। बिलासपुर के अलौकिक के साथ आए उनके पिता संजय मिश्रा का कहना है कि मंच तो बहुत बड़ा है और बच्चों को इस मंच से बहुत उम्मीदे है, परंतु प्रतिभागियों को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बहुत ही कम समय दिया जा रहा है। मात्र दो मिनट का समय बहुत कम है कम से कम प्रतिभागियों को पूरा गाना गाने का समय मिलना चाहिए। हिमाचल की आवाज सीजन-2015 के पहले रनअप रहे मास्टर प्रिंस कपिल के पिता सुभाष कपिल इस बार अपने छोटे बेटे हिमांशु कपिल को ऑडिशन में लेकर आए थे। उनका कहना है कि ‘दिव्य हिमाचल१ का मंच बहुत बड़ा मंच है। इस मंच के माध्यम से बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा निकर कर बाहर आ रही है और इसके प्रयासों से आज कई युवा स्टार बन चुके हैं। इसी मंच से वर्ष 2015 में उनका बड़ा बेटा मास्टर प्रिंस कपिल निकला था, जो आज पूरे प्रदेश में धमाल मचा रहा है, जिसका सारा श्रेय ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया ग्रुप को जाता है। इसी मंच से स्टार बन चुके बेटे को देख कर उन्होंने छोटे बेटे को भी इसी फिल्ड में उतारने का फैसला लिया है। आज उनके छोटे बेटे ने पहली बार संगीत के क्षेत्र में ‘दिव्य हिमाचल’ के मंच पर ऑडिशन दिया है। इस मंच की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।

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