दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे…

सिद्धिदात्री रत्नगर्भा रत्नगर्भाश्रया परा।

दैत्यहंत्री स्वेष्टदात्री मङ्गलैकसुविग्रहा।। 56।।

पुरुषांतर्गता चैव समाधिस्था तपस्विनी।

दिविस्थिता त्रिणेत्रा च सर्वेन्द्रियमनाधृतिः।। 57।।

सर्वभूतहृदिस्था च तथा संसारतारिणी।

वेद्या ब्रह्मविवेद्या च महालीला प्रकीर्तिता।। 58।।

ब्राह्मणिबृहती ब्राह्मी ब्रह्मभूताऽघहारिणी।

हिरण्मयी महादात्री संसारपरिवर्तिका।। 59।।

सुमालिनी सुरूपा च भास्विनी धारिणी तथा।

उन्मूलिनी सर्वसभा सर्वप्रत्ययसाक्षिणी।। 60।।

सुसौम्या चंद्रवदना ताण्डवासक्तमानसा।

सत्त्वशुद्धिकरी शुद्धा मलत्रयविनाशिनी।। 61।।

जगत्त्त्रयी जगन्मूर्तिस्त्रिमूर्तिरमृताश्रया।

विमानस्था विशोका च शोकनाशिन्यनाहता।। 62।।

हेमकुण्डलिनी काली पद्मवासा सनातनी।

सदाकीर्तिः सर्वभूतशया देवी सतांप्रिया।। 63।।

ब्रह्ममूर्तिकला चैव कृत्तिका कञ्जमालिनी।

व्योमकेशा क्रियाशक्तिरिच्छाशक्तिः परागतिः।। 64।।

क्षोभिका खण्डिकाभेद्या भेदाभेदविवर्जिता।

अभिन्ना भिन्नसंस्थाना वशिनी वंशधारिणी।। 65।।   

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