दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे…

गुह्यशक्तिर्गुह्यतत्त्वा सर्वदा सर्वतोमुखी।

भगिनी च निराधारा निराहारा प्रकीर्तिता।। 66।।

निरङ्कुशपदोद्भूता चक्रहस्ता विशोधिका।

स्रग्विणी पद्मसम्भेदकारिणी परिकीर्तिता।। 67।।

परावरविधानज्ञा महापुरुषपूर्वजा।

परावरज्ञा विद्या च विद्युज्जिह्वा जिताश्रया।। 68।।

विद्यामयी सहस्राक्षी सहस्रवदनात्मजा।

सहस्ररश्मिःसत्वस्था महेश्वरपदाश्रया।। 69।।

ज्वालिनी सन्मया व्याप्ता चिन्मया पद्मभेदिका।

महाश्रया महामंत्रा महादेवमनोरमा।। 70।।

व्योमलक्ष्मीः सिंहरथा चेकितानाऽमितप्रभा।

विश्वेश्वरी भगवती सकला कालहारिणी।। 71।।

सर्ववेद्या सर्वभद्रा गुह्या दूढा गुहारणी।

प्रलया योगधात्री च गङ्गा विश्वेश्वरी तथा।। 72।।

कामदा कनका कांता कञ्जगर्भप्रभा तथा।

पुण्यदा कालकेशा च भोक्तत्री पुष्करिणी तथा।। 73।।

सुरेश्वरी भूतिदात्री भूतिभूषा प्रकीर्तिता।

पञ्चब्रह्मसमुत्पन्ना परमार्थाऽर्थविग्रहा।। 74।।

वर्णोदया भानुमूर्तिर्वाग्विज्ञेया मनोजवा।

मनोहरा महोरस्का तामसी वेदरूपिणी।। 75।।   

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