धर्मशाला में किताबों के कारोबार में आई बहार

धर्मशाला    —नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से पुलिस मैदान धर्मशाला में आयोजित पुस्तक मेला लेखकों व किताब प्रेमियों को संजीवनी दे गया। लंबे समय बाद सजे इस मेले में न केवल किताबों को खरीदने और बेचने का काम हुआ, बल्कि कई किताबों के विमोचन और साहित्यक गोष्ठियां भी सजीं। इसमें लेखन और साहित्य से जुड़े बुद्धिजीवी वर्ग ने अपने विचार सांझा किए। बाल कलाकारों को भी अपना हुनर दिखाने के लिए इस मेले में मंच प्रदान किया गया। भले ही बड़े शहरों की तर्ज पर स्टाल लगाने वालों को लाभ न हुआ हो, लेकिन नई पीढ़ी में भी पठन-पाठन की रुचि जगाने के लिए यह पुस्तक मेला अपनी अलग छाप छोड़ गया।  पुस्तकों की तलाश में दिल्ली सहित विभिन्न शहरों के चक्कर लगाने वालों के लिए यह मेला वरदान सिद्ध हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय ने ही इस मेले में लाखों की किताबें खरीदीं। किताबों के अलावा विज्ञान व शिक्षा से जुड़े अन्य यंत्रों को भी छात्रों व बच्चों से खूब पसंद किया। धार्मिक ग्रंथों में रुचि रखने वालों को यहां चार वेद के प्रमुख ग्रंथों से लेकर छोटी किताबें इस मेले में आसानी से मिल गईं।

पिता-पुत्री की किताबों का एक साथ लोकार्पण

धर्मशाला। प्रसिद्ध लेखक व सहित्यकार डा. प्रत्यूष व डा. अदिति गुलेरी की पुस्तकों का विमोचन धर्मशाला पुस्तक मेले के अंतिम दिन हुआ। पिता व पुत्री दोनों की किताबें एक साथ बाजार में आईं। डा. प्रत्यूष गुलेरी के काव्य संग्रह ‘गांव की मिट्टी’ और डा. अदिति गुलेरी के संग्रह ‘बात वजूद की’ का विमोचन प्रसिद्ध कवि व व्यंग्यकार डा. प्रेम जनमेजय, आलोक पुराणिक व ललित के हाथों हुया। इस समारोह में हिमाचल के साहित्यकारों में सुदर्शन वश्ष्ठि, गुरमीत बेदी, डा. अशोक गौतम, द्विवेंद्र द्विज, नवनीत शर्मा, राजीव त्रिगर्ती, आशुतोष गुलेरी, रमेश मस्ताना, वासुदेव शर्मा, प्रभात शर्मा, अरविंद शर्मा, डा. युगल किशोर डोगरा, भूपेंद्र भूपी सहित अन्य मौजूद रहे।

 

You might also like