नग्गर में शाड़ी जाच मेले का आगाज

पतलीकूहल—मेले हमारी प्राचीन संस्कृति और देव रीति की पहचान है आधुनिकता के इस दौर में हम अपनी संस्कृति खोते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं मेलों में जहां देवी-देवताओं का भव्य मिलन देखने को मिलता है वहीं आपस का भाईचारा भी बढ़ता है यह शब्द नग्गर शाड़ी जाच मेला में पूर्व सांसद महेश्वर सिंह से कहे। मेले में बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा की नग्गर शाड़ी जाच मेले का इतिहास बहुत ही पुराना है इस मेले को जहां नग्गर गांव के लोग मनाते हैं। वहीं, मलाणा गांव के लोग भी इस मेले में बहुत संख्या में आते हैं और मेले के दौरान होने वाले लोक नृत्य में वहां की महिलाएं खूब जोश से अपनी भागीदारी निभाती हैं। उन्होंने मेला कमेटी माता त्रिपुरा सुंदरी के बन रहे भंडार को जगतीपट निधि और स्वेच्छिक निधि से दो लाख नो हजार रुपए दिए। वहीं, मेले में आज भी सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों को वैसे ही निभाया जाता है जो आज से  सर्दियों पहले निभाया जाता था। शाड़ी जाच प्रसिद्व मेलों में से एक है। जिसे देखने के लिए लोगों कोसों दूर से नग्गर गांव पहुंचते हैं।

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