नशा माफिया के खिलाफ महकमे का जोश ठंडा

गगरेट—पहाड़ की जवानी की नसों में दौड़ रहे गर्म खून को धीमे जहर के साथ ठंडा करने में लगे नशा माफिया की कमर तोड़ने के लिए जनता का साथ पाने की उत्मीद के साथ जिला पुलिस द्वारा शुरू की गई मुहिम पुलिस की निष्क्रियता के चलते दम तोड़ गई। नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों की जानकारी हासिल करने के लिए नशा माफिया का सीधा सामना करने में असहज महसूस कर रहे लोग अपना नाम व पता गुप्त रख कर ऐसी जानकारियां पुलिस के साथ साझा कर सकें। इसके लिए पुलिस द्वारा विधानसभा क्षेत्र गगरेट के विभिन्न गांवों में नशाखोरों की जानकारी हासिल करने के लिए शिकायत पेटियां स्थापित करवाई, लेकिन नशा माफिया के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले प्रदेश में पुलिस ने कभी इन शिकायत पेटियों को खोल कर यह देखने की जहमत ही नहीं उठाई कि क्या किसी सजग नागरिक ने समाज को नशा मुक्त बनाने में अहम योगदान देते हुए कोई जानकारी तो साझा नहीं की है। पंजाब के साथ सटे जिला ऊना में चिट्टा माफिया द्वारा युवा पीढ़ी को निशाना बनाते हुए धड़ल्ले से यहां इस धीमे जहर को पहुंचाने का काम किया और जिला पुलिस ने चिट्टे की खेप के साथ कई युवाओं को भी धरा। यहां तक कि एक मामले में तो पुलिस ने चिट्टा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए होशियारपुर से चिट्टे के कारोबार में संलिप्त एक आरोपी के घर में दबिश देकर भारी मात्रा में चिट्टा बरामद करते हुए होशियारपुर पुलिस को उक्त मामला भी सौंपा। जिला में कई युवाओं की हुई रहस्यमय मौत के बाद इसके लिए चिट्टे को जिम्मेवार भी ठहराया गया। बेशक आम जनता माफिया के खिलाफ खुलकर सामने आने से भी हिचकिचाती है इसलिए ही पुलिस ने विधानसभा क्षेत्र गगरेट के विभिन्न गांवों में स्थित लोकमित्र केंद्रों के बाहर नशा माफिया की जानकारी साझा करने के लिए शिकायत पेटियां भी स्थापित करवाई, लेकिन स्थापित होने के बाद पुलिस ही इनकी सुध लेना भूल गई। इन शिकायत पेटियों के माध्यम से नशा माफिया के विरुद्ध कोई जानकारी आई पुलिस भी यह नहीं जानती। ऐसे में सवाल यह है कि क्या ये शिकायत पेटियां महज जनता में यह प्रचारित करने के लिए ही लगाई गई कि पुलिस नशा माफिया के समूल नाश के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि नशा माफिया के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ने के लिए पुलिस थाना स्तर पर नशा निवारण समितियां भी गठित की गई, लेकिन इनकी नियमित बैठकें होना अब बीते जमाने की बात हो गई है। उधर, डीएसपी मनोज जम्वाल का कहना है कि यदि शिकायत पेटियां नियमित रूप से नहीं खोली जा रही हैं तो वह इसका पता करवाएंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि क्या इन पेटियों के माध्यम से कोई शिकायत सामने आई है।

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