नालागढ़ में मंगला दे मेले शुरू

नालागढ़—रियासतकाल से नालागढ़ में चलने वाले ऐतिहासिक मंगला दे मेले का शुभारंभ मंगलवार को हर्षोल्लास व धूमधाम से हुआ। पहले मेले के दिन श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था और सादी व वर्दी में जवान तैनात रहे। ज्येष्ठ माह के पहले मंगलवार से शुरू हुए यह मेले इस बार चार मंगलवारों तक सजेंगे, जबकि 17 जून को क्षेत्रवासियों के लिए भंडारे का भी आयोजन होगा। स्थानीय प्रशासन ने भी इन मेलों के उपलक्ष्य में तीसरे मंगलवार को स्थानीय अवकाश घोषित करता है, जो कि इस बार चार जून को होगा। जानकारी के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुरू होते ही ऐतिहासिक मंगला दे मेले का शुभारंभ होता है। हंडूर रियासत के राजा रामशरण के समय से करीब पांच सौ सालों से यह मेला मनाया जाता आ रहा है। नालागढ़ शहर के शीतला माता मंदिर परिसर में इन मेलों में भारी संख्या में श्रद्धालु यहां शीश नवाने आते है। इन मेलों में खासकर तीसरे मेले में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है और यहां नालागढ़ व दून के अलावा बाहरी राज्यों के श्रद्धालु शीश नवाने आते है। हंडूर रियासतकाल से प्रत्येक वर्ष लगने वाले इस बार के यह ऐतिहासिक मंगला दे मेले का शुभारंभ हो गया है। मेलों के दौरान श्रद्धालु यहां स्थित शीतला माता के मंदिर में जाकर हाजिरी भरते हैं और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते है। श्रद्धालु मंदिर में पवित्र जल, गुलगुले, चने, खील-बताशा व अनाज का प्रसाद चढ़ाते है। इन मेलों में बीबीएन क्षेत्र के अलावा पंजाब, हरियाणा आदि दूरदराज क्षेत्रों के हजारों की संख्या में लोग यहां शीश नवाने आते है और माता का आर्शीवाद प्राप्त करते है। शीतला माता मंदिर की मान्यता है कि बच्चों व बड़ों को होने वाली फोड़ा, फूंसी, चिकनपॉक्स आदि चर्म रोगों का उपचार होता है, जिसके चलते लोग यहां भारी संख्या में अपने परिवार सहित आते हैं और बच्चों से लेकर बुजुर्ग यहां मंदिर में शीश नवाते हंै। गौरतलब है कि यह मेला हंडूर रियासत के शासनकाल से मनाया जाता आ रहा है और इस मंदिर में पुश्त दर पुश्त महंत गंगादास का परिवार इसकी सेवा करता आ रहा है।

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