नालागढ़ में हांफी पेयजल योजनाएं

नालागढ़—नालागढ़ उपमंडल में गर्मी ने अब अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है और इसका असर अब आम जनजीवन पर पड़ने लगा है। जहां लोग गर्मी में पसीने से तर होने लगे हैं और गर्मी से बचने के लिए हर प्रकार के उपाय करते नजर आ रहे है, वहीं अब क्षेत्र की पेयजल व सिंचाई योजनाओं का भूमिगत जल स्तर भी गिरने लगा है। आईपीएच नालागढ़ डिवीजन के तहत 70 फीसदी योजनाओं का 40 प्रतिशत तक भूमिगत जल स्तर गिर गया है, जिससे लोगों को अब पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। आईपीएच विभाग द्वारा कुछ स्थानों पर अस्थायी तौर पर पेयजल किल्लत से निपटने की व्यवस्था की हुई है, लेकिन यदि क्षेत्र में बारिश नहीं हुई तो भूमिगत जल स्तर और नीचे चला जाएगा, जिससे आगामी दिनों में लोगों की समस्या में और इजाफा होगा। बारिशें हुई तो भूमिगत जल स्तर भी सुधर जाएगा। फिलवक्त मौजूदा समय में भूमिगत जलस्तर 40 फीसदी तक गिर गया है। जानकारी के अनुसार गर्मियों के रौद्र रूप धारण करने के उपरांत अब भूमिगत जलस्तर पर इसका असर पड़ना शुरू हो गया है। आईपीएच नालागढ़ डिवीजन के तहत आने वाले बीबीएन क्षेत्र की कई योजनाएं प्रभावित हो चुकी है। नतीजतन लोगों की समस्याएं भी बढ़नी शुरू हो गई है। बताया जाता है कि खड्डों व चश्मों पर आधारित पेयजल योजनाओं का जलस्तर गिरने से समस्या पेश आई है। आईपीएच नालागढ़ डिवीजन के तहत 160 पेयजल योजनाओं व 150 सिंचाई योजनाओं के द्वारा लोगों को पेयजल एवं सिंचाई के पानी की आपूर्ति मुहैया करवा रहा है और इन्हीं योजनाओं में से कई योजनाओं में समस्या पेश आने लगी है। बता दें कि हर साल गर्मियों में औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में अत्यधिक गर्मी पड़ती है और मई माह के आगाज के साथ ही क्षेत्र का अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहंुच चुका है और रविवार को क्षेत्र का अधिकतम तापमान 41 डिग्री रहा है।  आईपीएच नालागढ़ डिवीजन के एक्सईएन आरके खाबला ने कहा कि गर्मी बढ़ने से 70 प्रतिशत योजनाओं का 40 फीसदी जलस्तर गिर गया है। उन्होंने कहा कि विभाग अपनी ओर से पूरी तरह से प्रयासरत है और जहां अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र होंगे वहां पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति मुहैया करवाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसी को भी पेयजल किल्लत से न जूझना पड़े।

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