निजी संस्थानों की हार्ड डिस्क-सॉफ्टवेयर जब्त

शिमला – करोड़ों के स्कॉलरशिप घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने निजी शिक्षण संस्थानों से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्ड डिस्क कब्जे में ले ली है, जिसमें छात्रों के दाखिले से लेकर फी स्ट्रक्चर कर पूरा ब्यौरा होगा। सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक कई दिनों से सीबीआई की जांच टीम ने प्रदेश और प्रदेश से बाहर संचालित निजी शिक्षण संस्थानों में छापामारी का दौर जारी रखा है। अब तक 22 में से 16 निजी शिक्षण संस्थानों में दबिश देकर सॉफ्टवेयर और हार्ड डिस्क सीबीआई ने कब्जे में ले ली है। साथ ही संबंधित शिक्षण संस्थानों से वर्ष 2014 से 2018 तक हुए छात्रों के दाखिले का पूरा ब्यौरा भी मांगा है, जो उस सॉफ्टवेयर और हार्ड डिस्क से मिलान होगा। ऐसे में यही सॉफ्टवेयर और हार्ड डिस्क ही छात्रों की संख्या का असली राज खोलेगा। अधिकांश निजी शिक्षण संस्थानों पर आरोप हैं कि छात्रों की संख्या से अधिक छात्रों को स्कॉलरशिप दर्शाया गया। अब आने वाले दिनों में सीबीआई कई खुलासे कर सकती है। उल्लेखनीय है कि 250 करोड़ से अधिक के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की तह खंगालने के लिए सीबीआई ने हाल ही में हरियाणा के अंबाला, पंजाब के नवांशहर और जालंधर में नामी निजी शिक्षण संस्थानों में दबिश दी थी, जहां स्कॉलरशिप घोटाला हुआ है। हालांकि इन संस्थानों का नाम सीबीआई ने गोपनीय रखा है, लेकिन आने वाले दिनों में कई खुलासे हो सकते हैं।

22 निजी संस्थान राडार पर

हिमाचल सहित पड़ोसी राज्यों के 22 निजी शिक्षण संस्थान ऐसे हैं, जहां छात्रों की स्कॉलरशिप हड़पने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। बताया जा रहा है कि चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19 हजार 915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।

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