निधि ने बचाई सरकारी स्कूलों की लाज

सरकाघाट—हिमाचल शिक्षा बोर्ड का मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा परिणाम पिछले तीन साल के मुकाबले सबसे कम है।  वर्ष 2015-16 में यह 66.88 फीसदी परिणाम था, जबकि 2016-17 में 87.57 और 2017-18 में 63.39 फीसदी परिणाम था। इस वर्ष परिणाम लुढ़क कर 60.79 फीसदी पहुंच गया। हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सोमवार को दसवीं कक्षा की परिणाम घोषित कर दिया है. रिजल्ट में इस बार भी सरकारी स्कूलों को पछाड़ते हुए निजी स्कूलों ने अपना दबदबा कायम किया है। मैरिट लिस्ट के टॉप टेन में 39 बच्चों ने जगह बनाई है, इसमें केवल एक ही सरकारी स्कूल छात्रा जगह बना पाई है। यूं कहें कि ऊना के घनारी स्कूल की छात्रा निधि प्रदेश के 2750 के करीब स्कूलों में से इकलौती छात्रा है, जो मैरिट में शामिल हैं। ऊना के घनारी स्कूल की निधि को मैरिट में दसवां स्थान मिला है। निधि ने 682 अंक हासिल किए हैं। टॉप टेन में शामिल कुल 39 विद्यार्थियों में से 38 विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों से हैं। गौरतलब है कि मैट्रिक के सभी विद्यार्थियों को दो फीसदी ग्रेस मार्क्स भी दिए गए हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार तीन फीसदी परिणाम लुढ़का है। इस बार परीक्षा परिणाम 60.79 फीसदी रहा। मैट्रिक के पहले तीन स्थानों में कुल छह विद्यार्थियों में तीन लड़के और तीन लड़कियां शामिल हैं। दसवीं में चार साल बाद लड़के ने टॉप किया है।

2017 में भी सरकारी से एक ही बेटी थी मैरिट में

गौरतलब है कि 2017 में मैरिट सूची में 33 छात्र-छात्राओं ने स्थान बनाया था। मैरिट लिस्ट में एकमात्र सरकारी स्कूल एलएम गर्वनमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल परोल, हमीरपुर की छात्रा शिवाली ने 97.71 प्रतिशत अंक लेकर दसवां स्थान प्राप्त किया था। हिमाचल प्रदेश भर में प्रथम तीन स्थानों पर रहने वाले बच्चों ने हिंदी, विज्ञान, गणित जैसे विषयों में 100 में से 100 अंक लेकर रिकार्ड बनाया था।

टीहरा स्कूल का रिजल्ट सराहा

टीहरा। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टीहरा का दसवीं कक्षा का परिणाम 80 प्रतिशत रहा। स्कूल प्रधानाचार्य सुरेश ठाकुर ने बताया कि कक्षा के 20 विद्यार्थियों ने दसवीं की परीक्षा दी थी, जिनमें से 16 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं और चार विद्यार्थी फेल हुए हैं। बेहतर परिणाम के लिए उन्होंने स्कूल के अध्यापकों, अभिभावकों व विद्यार्थियों को बधाई दी है।

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