निवेश में झांकता रोजगार

May 10th, 2019 12:05 am

चुनाव के बीचोंबीच हिमाचल की इन्वेस्टर मीट की तारीख जाग जाती है और प्रक्रिया के प्रारूप में देशी-विदेशी निवेश की घंटियां बज उठती हैं। हालांकि चुनाव के दौर में हिमाचल की विकास गाथा कहीं गूंज नहीं रही, लेकिन निवेश की महत्त्वाकांक्षा सिर उठाकर कुछ कह देती है। निवेश की राहों को केवल चुनाव हो जाने का इंतजार है या हिमाचल सरकार ने निवेश हासिल करने की प्रतिज्ञा कर रखी है। जो भी हो आशा के द्वार पर सजा यह अभियान जयराम सरकार की इच्छाशक्ति से अस्तित्व बटोरने सरीखा है। यहां सपने बड़े हैं और नवाचार का बड़े से बड़ा मार्ग प्रशस्त होता दिखाई देता है। निवेश की जरूरतों में सरकार के संकल्प कुछ क्षेत्रों को चिन्हित करके चल रहे हैं, जबकि बिना लक्ष्यों के भी नन्हे कदमों का योगदान हिमाचल में रहा है। स्वरोजगार हासिल करने की तमन्ना ने जो निवेश पैदा किया, उसको हम हिमाचल के हर कोने में छू सकते हैं। यह दीगर है कि अब धीरे-धीरे गावं-कस्बे की हट्टी को मॉल की चमक छीन रही है। ऐसे में रोजगार के बदलते पैमानों में निवेश के सूत्रधार को वहां तक ले जाना होगा, जहां लघु निवेश की सीमा समाप्त न हो। इन्वेस्टर मीट तक यह भी तो तय होगा कि सरकारी क्षेत्र किस हद तक अपनी जिम्मेदारियों से किनारा करेगा या प्रतिस्पर्धा में बरकरार रहने की कोई वजह रहेगी। हालांकि चुनाव के शोर में विकास और आत्मनिर्भरता के लिहाज से हिमाचल अपनी चुनौतियां व खतरों पर चर्चा नहीं कर रहा, फिर भी निवेश की अधोसंरचना में जिक्र कांगड़ा के आईटी पार्क का उठा है, तो हवाई अड्डों के विस्तार का प्रश्न भी कांग्रेस ने पूछ लिया। जाहिर है सरकारी मशीनरी अपने खाके पर काम कर रही है, लेकिन इसका अता-पता नहीं कि निवेश और रोजगार का आगे चलकर रिश्ता क्या होगा। मानव संसाधन की दृष्टि से हिमाचल की तैयारी क्या निवेशक को संतुष्ट कर पाएगी या मैत्रीपूर्ण वातावरण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निवेश के जोखिम कम से कम होंगे। अभी तक निवेश केवल औद्योगिक स्थिति में ही परिभाषित हुआ है, जबकि अब इसके साथ एक नया हिमाचल भी जन्म ले रहा है। यह शहरी विकास, पर्यटन, मनोरंजन, अधोसंरचना, शिक्षा-चिकित्सा से लेकर कृषि-बागबानी तथा परिवहन क्षेत्र तक हो सकता है, तो इस दायित्व में राज्य को अपनी गारंटी बढ़ानी होगी। कम से कम निवेश नीति के तहत लघु व्यवसायी से बड़े निवेशक तक का रास्ता तथा परिपाटी एक जैसी हो। स्वरोजगार में रोजगार का पक्ष मजबूत करने के लिए भी हिमाचल कसरत करे, ताकि लघु निवेश से यह आंकड़ा निरंतर बढ़े। इसके लिए हर जिला में निवेश केंद्रों, परिसरों तथा परियोजनाओं की परिकल्पना आवश्यक है। कोई बड़ा निवेशक अगर ट्रांसपोर्ट नगर बसाता है, तो इसकी परिधि में स्वरोजगार के जरिए रोजगार की सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। इसी तरह निवेश की हर परियोजना व सहमति के साथ सीधे रोजगार के अलावा स्वरोजगार के अवसर जोड़ने होंगे। हिमाचल में टैक्सी आपरेशन अगर सुव्यवस्थित करना है तो निवेशक कंपनी को गारंटी देनी पड़ेगी। इन्वेस्टर मीट से पहले सबसे बड़ा अध्ययन या सर्वेक्षण तो उपलब्ध मानव संसाधन पर करना होगा। हिमाचल में कितने और किस आधार के प्रोफेशन उपलब्ध हैं तथा अन्य डिग्री धारकों की क्षमता में निवेश को कितना समर्थन मिलेगा, इसकी गणना तय करनी होगी। सरकारी नौकरी के मोहजाल से अगर हिमाचली युवक अलहदा नहीं हुआ, तो निवेश की राहें कितनी सफल होंगी। अतः हिमाचली मानव संसाधन की नए सिरे से काउंसिलिंग करने का समय आ गया है। शिक्षा और रोजगार के बीच करियर अपनाने के लिए मानसिक दृढ़ता का विकास जरूरी है और यह स्कूली संस्कार से अभिभावकों के व्यवहार तक एक सेतु के रूप में परिलक्षित करना होगा।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आप स्वयं और बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाना चाहते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV