नेताओं की चुप्पी तोड़ेगा नोटा

धर्मशाला   —कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में हर दिन सियासी समीकरण बदल रहे हैं। सतारूढ़ दल भले ही मोदी लहर के सहारे चल रहा हो, लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही हैं। जनता पिछले पांच साल में किए गए वादों पर जवाब मांग रही है। हालांकि नेता इस बार के लोकसभा चुनावों में न तो इन मुद्दों पर कुछ कह रहे हैं और न ही कोई नया वादा कर रहे हैं। सतारूढ दल के चार मंत्रियों एवं विधायकांें सहित प्रचारकों की फौज पर पुराने वादे भारी पड़ते दिख रहे हैं। जनता नेताओं को घेरने के पूरे मूढ़ में है। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर की बात करें, तो युवा पीढ़ी सहित पढ़े लिखे मतदाता ऐसे हालात में नोटा की तरफ रुख कर सकते हैं, जिसका राजनीतिक दलों को सीधा नुकसाान झेलना पड़ेगा। अन्य राज्यों की मत प्रतिशता को देखें, तो लोगों में लोकसभा चुनावों को लेकर कोई खासा उत्साह भी नहीं दिख रहा है। नेताओं के यही हालात रहे तो 19 मई तक बड़े उलटफेर के कयास लगाए जा रहे हैं।  कुछ विधानसभा क्षेत्रों को छोड़ देें तो अधिकतर में न तो नेता और न ही कार्यकर्ता लोगों के घरों तक वोट मांगने पहुंच पाए हैं। इसके चलते अलग-अलग कस्बों में पार्टी समर्थकों के साथ होने वाली नुक्कड़ सभाओं में न बुलाए जाने वाले सामान्य लोग उलटे नाराजगी जताते हुए पुराने मुद्दों को धार दे रहे हैं।

जनता सब सीखाने को तैयार

कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में हर दिन बदलते समीकरणों के बीच अब लोग नेताओं के छींटाकसी भरे लच्छेदार भाषणों पर तंज कसते हुए मुद्दों पर आधारित बात करने को कह रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक एक आवाज सुनने को मिल रही है, कि नेता जब जनता के मुद्दों की बात नहीं कर रहे, तो इन्हें नापंसद कर सबक सिखाया जाए।  

इन मुद्दो पर खूब बहस

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में लोगों ने भाजपा द्वारा किए गए वादों चंबा के सीमेंट प्लांट, कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तरीकरण, कांगड़ा रेलवे को ब्राडगेज करने, आईटी पार्क बनाने, चामुंडा-होली सुरंग से कांगड़ा व चंबा को जोड़ने, नेशनल हाई-वे को फोरलेन बनाने और केंद्रीय विवि का कैंपस तैयार कर कक्षाएं चलाने, रोप-वे बनाने के मुद्दों पर लोग खूब बहस कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर चौराहों एवं चौपालों पर इन दिनों यह कांगड़ा-चंबा के सभी मुद्दे छाए हुए हैं। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भले ही मंत्रियों एवं प्रचारकों की फौज काम कर रही हो, लेकिन जनता के मुद्दे अब नेताओं पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।

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