नेरचौक में एम्स कक्षाओं पर संशय

मंडी—नेरचौक मेडिकल कालेज में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर की कक्षाएं चलाने पर फुट स्टॉप लगता नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि नेरचौक मेडिकल कालेज में एम्स कक्षाएं चलाने के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट से बात आगे नहीं बढ़ पाई है। नेरचौक मेडिकल कालेज में एम्स की कक्षाएं शुरू करने के लिए फरवरी माह में ही फिजिबिलिटी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई थी, लेकिन उसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और दस मार्च को लोकसभा चुनावों के चलते आदर्श आचार सहिंता लागू हो गई। अब 27 मई को कोड ऑफ ंकंडक्ट तो हटा दिया गया है, लेकिन इस बाबत कोई भी दिशा-निर्देश नेरचौक मेडिकल कालेज को नहीं आए हैं। यहां बता दें कि नए नवेले लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कालेज नेरचौक में यदि एम्स बिलासपुर की कक्षाएं शुरू होती हैं तो यह नेरचौक मेडिकल कालेज के लिए संजीवनी से कम साबित है।  नेरचौक मेडिकल कालेज की खासियत उसका इंफ्रास्ट्रक्चर ही है। ऐसे में इतने बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल एम्स की कक्षाओं के लिए भी इस्तेमाल में आएगा। यही नहीं, पहले दो बैच के लिए तो नेरचौक मेडिकल कालेज में स्टूडेंट्स के लिए होस्टल फेसिलिटी भी उपलब्ध है। इसके अलावा फिजिबिलिटी रिपोर्ट में प्रैक्टिकल और थ्योरी कक्षाओं का तोड़ भी ढूंढ लिया गया है। इसमें प्रैक्टिकल और थ्यूरी के लिए छात्रों को शिफ्टों में बाटा जाएगा। हालांकि फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगने पर नेरचौक मेडिकल कालेज की उम्मीदें जवां हुई थीं, लेकिन अब आगे कोई भी कार्रवाई नहीं होने से यह उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। उधर, डा. रजनीश पठानिया प्राचार्य, एलबीएस मेडिकल कालेज नेरचौक का कहना है कि  फिजिबिलिटी रिपोर्ट काफी पहले सरकार को सौंप दी गई है। उसके बाद फिलहाल अभी तक कोई पत्राचार नहीं हुआ है

क्या होंगे फायदे

एम्स की कक्षाएं यदि मेडिकल कालेज में चलती हैं तो सबसे ज्यादा जो फायदा मरीजों को ही मिलेगा। मेडिकल कालेज में सीधा ही डाक्टरों की संख्या दोगुनी हो जाएगी, क्योंकि एम्स के डाक्टर भी नेरचौक मेडिकल कालेज में ही पढ़ाएंगे। इसके अलावा कई अन्य तरह की सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी।

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