नौकरी न मिली तो दबाएंगे नोटा

सुंदरनगर—करुणामूलक संघ ने प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में चेताया है कि अगर प्रदेश सरकार को प्रदेश भर के उन 2200 परिवारों व आश्रितों के वोट चाहिए, जो पिछले दस बारह सालों से करुणामूलक नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, तो उनके हित में निर्णय अविलंब लें। अन्यथा प्रदेश करुणामूलक संघ एकजुट होकर इस लोकसभा चुनाव में नोटा दबाएगा। वह इसलिए कि न तो पिछली सरकार के समय राहत मिली है और न ही वर्तमान सरकार में। संघ ने वर्तमान सरकार से निवेदन किया है कि ्रकरुणामूलक नौकरी के लिए जो वर्तमान में नई नीति बनाई है। उसमें जल्द संशोधन करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने विश्वास दिया है कि कोई भी आश्रित परिवार नौकरी के बगैर नहीं रहेगा। तभी सभी पात्र लाभार्थी प्रदेश और देश हित के लिए सोचेंगे, वरना नहीं। नई नीति के तहत लगभग सभी लोगों के आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। संघ ने मुख्यमंत्री को भी इस विषय पर अवगत करवा रखा है। लेकिन संघ के समझ में तो यह नहीं आता कि सरकार नीति बनाती है 2019 में और उसको लागू कर रही है दस और बारह साल पुराने केसों पर, यह कहां तक न्यायसंगत है। यह विचार करने की बात है। सर्वोच्च न्यायालय से फैसला आए हुए तीन महीने बीत गए, उन आश्रितों को भी अभी राहत नहीं मिल पाई है। जो आश्रित सर्वोच्च न्यायालय तक लडे़, उन आश्रितों का क्या कसूर है। जिन्होंने अपने परिवार का सदस्य तो खोया पर जब उनकी जगह पर करुणामूलक नौकरी के लिए निवेदन किया तो यहां पर सरकारों के ये हाल हैं, जा ेकि स्थिति स्पष्ट करते हंै कि  सिर्फ  जनता से वोट चाहिए, न कि उनके लिए उनके दुख के समय उनके साथ खड़े होना। जो कि बड़े लज्जा की बात है। अगर प्रदेश सरकार को इन परिवारों के वोट चाहिए, तो आगे आकर ऐसे परिवारों की हर हाल सहायता करनी होगी। वरना परिणाम अच्छे नहीं होंगे। प्रदेश करुणामूलक संघ ने निर्णय लिया है कि अगर सरकार चुनाव से पहले इस विषय पर विचार नहीं करती है तो सभी इस लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाकर चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

You might also like