पंचकर्म का जमाना जल्द लौटेगा

शिमला —चुनाव के बाद शिमला के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालांे मंे पंचकर्म होगा। आचार संहिता समाप्त होने के बाद आयुर्वेद विभाग मंे इलाज की कई पुरानी विधियां भी अस्पतालांे मंे शुरू हो पाएगी, जिसे प्रथम चरण के तहत शिमला मंे जल्द शुरू किया जाने वाला है। प्रदेश मंे इलाज की अब आठ प्राचीनतम विधियांे के तहत आयुर्वेदिक डाक्टरांे की ट्रेनिंग भी लगभग पूरी हो गई है। इसमंे मर्म चिकित्सा, अनु शास्त्रा कर्मा, सिराविदेश, अग्निकर्मा, जालूका अविचरण, अलाबू कर्मा, मृतिका चिकित्सा और शतकर्मा विधि के तहत सभी आयुर्वेदिक अस्पतालांे मंे मरीजा़ंंे को इलाज दिया जाना तय किया गया है। ये ट्रेनिंग शिमला मंे हुई है। आचार संहिता के समाप्त होने के बाद सबसे पहले इन विधियांे मंे से आयुर्वेद विभाग की ओर से सभी अस्पतालांे मंें पंचकर्म के तहत इलाज देने की प्रक्रिया को तेज़ किया जाने वाला है। जिसमंे सबसे पहले शिमला से ये विधि शुरू की जाने वाली है। अभी प्रदेश के मात्र चुनिंदा अस्पतालांे मंे ही पंचकर्म किया जा रहा है। जिसमंे शिमला के भी चुनिंदा अस्पताल शामिल है। फिलहाल आयुर्वेद विभाग के तहत आने वाली ये आठ तकनीक इलाज मंे काफी  पुरानी है और जनता के लिए काफी लाभप्रद्व भी सिद्व हो सकती है। जानकारी के मुताबिक आयुर्वेद विभाग के तहत प्रदेश के डॉक्टरांे को इन विधियांे को सिखाने की तकनीक भी बताई गई है। जिसके लिए केंद्र से नामी विशेषज्ञांे को बुलाया गया है। हालांकि इसमंे कुछ थेरेपी के तहत प्रदेश के डॉक्टरांे की ट्रेनिंग पूरी भी हो गई है। फिलहाल आयुर्वेद विभाग ये पूरी क ोशिश कर रहा है कि राज्य मंे जनता को आयुर्वेद इलाज की पुरानी तकनीकांे से रू-ब-रू करवाया जाए, जिसमंे खासतौर पर उन तकनीकांे को प्रच्चलित किया जाए जो आयुर्वेद क्षेत्र मंे ही गुम होकर रह गई हंै।

You might also like