पंचकूला के कोचिंग सेंटर खंगाले

गुजरात हादसे के बाद सकते में आया प्रशासन, नियमों को पालन न करने वालों पर कार्रवाई करने की चेतावनी

पंचकूला -स्मार्ट शहर पंचकूला की ज्यादातर मार्केट्स में मल्टीस्टोरी दुकानें जिनके सेकंड या टॉप फ्लोर्स पर बड़ी सख्यां में कोचिंग सेंटर्स चलाए जा रहे हैं। इनमें करीब 10 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स कोचिंग ले रहे हैं। इन कोचिंग सेंटर्स में आगजनी की घटना होने पर बचाव के इंतजाम नहीं है। ये खुलासा गुजरात की घटना के बाद होश में आए फायर विभाग के अफसरों की ओर से की गई चेकिंग के बाद पता चला है। चेकिंग के दौरान यह सामने आया है कि सभी कोचिंग सेंटर्स टॉप फ्लोर्स पर चल रहे हैं और उनमें बैक साइड से कोई भी फायर एक्जिट की सुविधा नहीं है, ताकि आपातकालीन परिस्थिति में बच्चों को उस रास्ते निकाला जा सके। इसके अलावा किसी भी सेंटर में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं पाया गया। साथ ही चेकिंग के दौरान किसी भी कोचिंग सेंटर में वेंटिलेशन भी नहीं पाया गया। सेंटर के अंदर बच्चों को बिना वेंटिलेशन के पढ़ाया जा रहा था। यहां तक कि लगभग सभी कोचिंग सेंटर्स में जाने के लिए एक ही सीढ़ी है और उस सीढ़ी के रास्ते में बिजली की तारों की जाल और बिजली के मीटर की वजह से कभी भी आग लग सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है। पंचकूला के लगभग हर सेक्टर 4, 5, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 12ए, 14, 15, 16, 17, 20, 21, 25, 26 सहित अन्य सेक्टरों की मार्केट् के शोरूम के टॉप फ्लोर्स पर सेंटर्स चलाए जा रहे हैं।

फरमान जारी तो कर दिया, लेकिन कार्रवाई में रोड़ा बनेंगे एचएसवीपी के नियम

फायर आफिसर ने तो पिछले हिस्से से रास्ता बनाने का फरमान जारी कर दिया, मगर ऐसा होता है तो यह सीधे एचएसवीपी के नियमों की उल्लंघना होगी। नियमों के मुताबिक किसी भी शोरूम या बूथ के पीछे गेट नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में कोचिंग सेंटर्स के पास कोचिंग बंद करने के बजाय दूसरा रास्ता है कोचिंग सेंटर्स को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर लें। अगर वह टॉप फ्लोर पर कोचिंग सेंटर्स के पीछे से फायर एक्जिट बनाते हैं तो उनके खिलाफ एचएसवीपी की ओर से कार्रवाई की जाएगी और नहीं बनाते हैं तो फायर विभाग कार्रवाई करेगा। ऐसे में बेहतर यही होगा कि वह कोचिंग सेंटर्स को टॉप फ्लोर्स से ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर लें, ताकि गुजरात के सूरत जैसे हादसे में बच्चों की जान नहीं जाए।

 

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