पंजाब यूनिवर्सिटी में नहीं बढ़ेगी फीस

तीन लाख स्टूडेंट्स को बड़ी राहत, सिंडीकेट की बैठक में एग्जाम फीस के अलावा कई अधिकारियों को भी एक्सटेंशन

चंडीगढ़ -पंजाब यूनिवर्सिटी और इससे संबद्ध कालेजों में पढ़ाई कर रहे तीन लाख स्टूडेंट्स को पीयू सिंडीकेट ने बड़ी राहत दी है। सिंडीकेट में एग्जामिनेशन फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सदस्यों ने मांग का विरोध किया, जिसके बाद फैसले पर रोक लगा दी गई। सिंडीकेट सदस्य डा. गुरमीत शर्मा ने कहा कि एक समय में वार्षिक एग्जाम हुआ करते थे और फीस मात्र 12 सौ रुपए होती थी, लेकिन आज एक साल को दो सेमेस्टर में कर दिया है और फीस तीन गुणा तक कर दी है।  छह गुणा फीस भरनी पड़ रही है। सिंडीकेट सदस्य रजत संधीर ने कहा कि पीयू में इकनोमिकल वीकर सेक्शन के भी स्टूडेंट्स हैं, जिनकी फीस कम करने पर विचार होना चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सब कमेटी का गठन किया गया, जोकि स्टूडेंट्स से फीडबैक लेते हुए आने वाले समय में एग्जामिनेशन फीस को बढ़ाने पर विचार करेगी। सिंडीकेट की बैठक में स्टूडेंट्स की एग्जामिनेशन फीस के अलावा विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों को एक्सटेंशन देने का मामला भी शामिल किया गया था। इसके अलावा सिंडीकेट में पहल के आधार पर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले ट्रांसजेंडर स्टूडेंट्स को सामान्य स्टूडेंट्स जैसे अधिकार देने का भी समर्थन किया है। एसडी कालेज सेक्टर-32 के प्रिंसिपल डा. भूषण कुमार शर्मा को एक्सटेंशन देने के विरोध में सीनेट सदस्य स्पेशल सीनेट बुलाने की मांग कर रहे थे। इसका निर्णय सिंडीकेट बैठक में होना था, लेकिन मामले को लीगल ओपिनियन के लिए भेजा गया है।

ट्रांसजेंडर्स को सामान्य स्टूडेंट्स के समान अधिकार

पंजाब यूनिवर्सिटी में ट्रांसजेंडर्स की फीस को माफ कर दिया गया है, लेकिन इसके साथ ही एक प्रतिबंध था कि वह किसी प्रकार के धरने प्रदर्शन में भाग नहीं ले सकते। बैठक में सिंडीकेट सदस्य कमल शर्मा ने कहा कि ट्रांसजेंडर्स को जब सामान्य स्टूडेंट्स के समान पढ़ने का अधिकार है, तो फिर कैंपस के अंदर उन्हें अधिकार मिलने चाहिए। जिसके बाद अब ट्रांसजेंडर्स पीयू में होने वाले धरना-प्रदर्शनों का हिस्सा बन सकेंगे। इस प्रकार का निर्णय देने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है।

350 कर्मियों के लिए खुशखबरी

पंजाब यूनिवर्सिटी में डीसी रेट पर 350 के करीब कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे थे। जिनका वेतन पीयू की तरफ से नहीं बढ़ाया गया था। बैठक में निर्णय लिया कि जिस कर्मचारी के दस साल पूरे हो जाएंगे, उसे डीए और डीपी के साथ अधिकार दिए जाएंगे। यह अधिकार पाने के बाद डीसी रेट पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन रेगुलर कर्मचारी के समान हो जाएगा।

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