पच्छाद की सड़कों की बिगड़ी सूरत

नैनाटिक्कर —पच्छाद क्षेत्र में यूं तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव तो है ही, परंतु क्षेत्र की अधिकांश छोटी-बड़ी सड़कों की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है, परंतु किसी भी राजनेता ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है। गौर हो कि 17वें लोकसभा चुनावों के लिए विभिन्न राजनीतिक दल जोर-शोर से अपने अपने चुनाव प्रचार के दौरान आम जनमानस को लुभावने वादे कर अपनी उपलब्धियों के दावे ठोंक रहे हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई कुछ ओर ही है, जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना बनाकर लोगों से वोट की अपील कर रही है। वहीं भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप पच्छाद क्षेत्र में एक प्रपत्र के जरिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकारों की उपलब्धियों के साथ-साथ पच्छाद विधायक के किए गए कार्यों का लेखा-जोखा दिया गया है, जिसमें पच्छाद की सड़कों को बजट मुहैया करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, परंतु धरातल पर सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। जी, हां हम बात कर रहे हैं पच्छाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कों की, जिनकी हालत बद से बदत्तर हो चुकी है तथा क्षेत्र के ग्रामीणों सहित स्कूल तथा कालेज के छात्र-छात्राओं को तो जान जोखिम में डालकर सफर करना ही पड़ता है, अपितु किसानों को भी अपनी नकदी फसलें इन्हीं टूटी-फूटी तथा खस्ताहाल सड़कों के ऊपर से ही मंडी तक पहुंचानी पड़ती है, जो कि किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है। क्षेत्र के गिरिपार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कें नैनाटिक्कर-दयोथल-औच्छघाट की बात करें तो सड़क की स्थिति इतनी दयनीय है कि समझ नहीं आता है कि सड़क में गड्ढे हैं अथवा गड्ढों में सड़क। इसी तरह नैनाटिक्कर-ढंग्यार रोड तथा नैनाटिक्कर से मेहंदोबाग-ढूंगाघाट सड़क जो कि अपनी हालत पर स्वयं आंसू बहा रही है। इसी तरह नारग क्षेत्र की सड़कों की बात करें तो दयोथल-नारग मार्ग से लेकर नारग से मरयोग सड़क तथा नारग से मढ़ीघाट-धरयार सड़क की खस्ताहालत किसी से छिपी नहीं है। इसी तरह अन्य छोटी-बड़ी सड़कें जैसे सादनाघाट-पटांजी-मशोबरा मार्ग, नैना देवी मंदिर मार्ग, पर्यटन तथा आस्था की दृष्टि से देखे जाने वाले भुरेश्वर महादेव मंदिर की सड़क, नैनाटिक्कर-ढगोथर मार्ग तथा डिलमन-शिनाघाट सड़क के खस्ताहाल तथा दयनीय स्थिति न तो राजनेताओं से छिपी है और न ही आम वोटरों से, जिनका असर आगामी लोकसभा चुनावों पर पड़ रहा है। हालांकि इन सड़कों की हालत लंबे अरसे से दयनीय है, परंतु न ही कांग्रेस कार्यकाल में इन सड़कों की ओर ध्यान दिया गया तथा न ही भाजपा के शासनकाल में इन सड़कों की सुध ली गई।

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