पर्यटन कारोबार के नाम पर चोरी

धर्मशाला   —पहाड़ पर पर्यटन कारोबार तो आपार है, लेकिन सरकारी नियंत्रण के अभाव में यहां धंधेबाजी अधिक बढ़ने लगी है। पर्यटन विभाग के पास कई तरह के काम हैं, इन्हें करने वालों की संख्या चुनिंदा ही है। छोटे विभाग पर बढ़ते बड़े बोझ को महकमा या तो समझ नहीं पा रहा है या सरकार दाबों से आगे निकल नहीं पाती है। पर्यटन उद्योग हिमाचल का सबसे बड़ा उद्योग बन कर उभर रहा है। हजारों लोग रोजगार व स्वरोजगार से जुड़ भी रहे हैं, लेकिन काम वैध न होने के कारण न तो यह लोग सरकारी गिनती में आ रहे हैं और न ही इन कामों से होने वाली आमदनी किसी गिनती या रोजगार की श्रेणी में आ रही है। अधिकतर स्थानों पर अबैध पर्यटन कारोबार के चलते न तो सरकार को लाभ मिल पा रहा है और न ही काम करने वाले युवा इसे सरकारी मापदंडों के आधार पर चला रहे हैंं। प्रत्येक पर्यटन सीजन में अबैध कारोबारी कोई न कोई नया फंडा तलाश लेते हैं। बड़े होटलों के बाद खुले आसमान में टैंट लगाकर चलने वाले कारोबार के साथ ही अब पर्यटक स्थलों पर बने पुराने भवनों व घरों में आनलाइन ठहराने का अबैध काम धड़ल्लेे से चल रहा है। हालात यह हैं कि कई नामी कंपनियां ऑनलाइन बुकिंग कर ऐसे धंधों को न केवल फैलाने का काम कर रही हैं, बल्कि भवन मालिकों सहित सरकार को भी लाखों के टैक्स का चूना लगा रही हैं। इस पर्यटन सीजन में मकलोडगंज, भागसूनाग, धर्मकोट व आसपास के क्षेत्रों में बंकर वैड के नाम से नया अबैध फंडा शुरू हो गया है। कई लोगों ने डबल बैड की केपैस्टी वाले कमरों में  पुराने होस्टल बैड की तरह एक बैड के ऊपर चार से पांच बैड बनाकर एक ही कमरे में आठ से दस लोगों को ठहराने की व्यवस्था कर दी है।  ऐसे में इन भवनों में रहने वाले लोगों के लिए सीवरेज, पीने के पानी, यूज करने को बिजली, पानी सहित अन्य उपयोगी चीजें क्वालिटी सहित मुहैया होंगी या नहीं ऐसे कई पहलु जुड़ जाते हैं।   इतना ही नहीं ऐसे संस्थानों में चलने वाली गतिविधियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। बिना पंजीकरण और सरकारी नियमों के चलने वाले ऐसे अनेकों काम पर्यटन की आड़ में चल रहे हैं। उधर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है और निदेशालय से ही निर्णय होना है। विभाग के पास काम के हिसाब से न तो अधिकारी हैं और न ही कर्मचारी। ऐसे में पर्यटन के नाम पर हजारों दुकाने तो खुल चुकी हैं पर उन पर नियंत्रण करना और उन्हें व्यवस्थित ढंग से चलाना टेड़ी खीर बन गया है। प्रदेश सरकार ने जल्द विभाग का स्ट्रेन्थन कर इस कार्य को नियंत्रण न लिया तो देवभूमि बदनाम हो जाएगी और पर्यटन कारोबार में गिराबट आ जाएगी।   

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