पुराने उद्योग ठप,नए का वादा

सुंदरनगर—प्रदेश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नए उद्योग लगाने के दावे किए जाते रहे हैं। जबकि पहले से स्थापित उद्योगों को चलाने वाली कांग्रेस और भााजपा की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों की सरकारों ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई थी। सुंदरनगर शहर के अंबेडकर नगर में दलित वर्ग को रोजगार देने के उद्देश्य से खोले गए पोली वस्त्र केंद्र और लैदर सेंटर में पिछले डेढ़ दशक से बंद पड़ा है। आलम यह है कि करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया इसका आज खंडर बनता जा रहा है। इस स्थान पर नया हथकरघा उद्योग लगाने के बारे में आश्वस्त किया था। जो आज दिन तक आश्वासन ही बनकर रह गया। जबकि प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की सरकारें रही है। लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इस ओर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। गौर रहे कि अंबेडकरनगर में दलित वर्ग के लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से 1992 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने पोली वस्त्र और लैदर पर आधारित यह उद्योग शुरू किया था। इसमें करीब 100 स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होता था। परंतु पूर्व सरकार ने इस उद्योग केंद्र को इसके उत्पादन की बाजार में मांग न होने के कारण बंद करवा दिया था। इसके बंद करने के पीछे बोर्ड का तर्क था कि यहां पर बनने वाले पोली वस्त्र और लैदर के सामान की बाजार में मांग न होने से खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को घाटा उठाना पड़ा रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस स्थान पर नया हथकरघा उद्योग लगाने के बारे में आश्वस्त किया था।

लाखों की मशीनरी फांक रही धूल

दलित वर्ग को रोजगार देने के मकसद से खोले गए पोली वस्त्र केंद्र और लैदर सेंटर में लाखों रुपयों की मशीनरी स्टोर में पड़ी हुई है। जिसे जंग ने अपनी जद में ले लिया है। पिछले डेढ़ दशक से इस उद्योग में ताला लटका हुआ है। वर्तमान में यहां पर 50 खड्डियां, 250 एमएनसी कताई मशीनों सहित लाखों रुपए का सामान स्टोर में धूल फांंक रहा है। यहां पर पड़ी एक कताई मशीन की बाजार में कीमत दस हजार से अधिक है।

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