पुष्पवर्षा

जेन कहानियां

सुभूति बुद्ध के योग्य शिष्य थे। वे शून्य का मर्म जानते थे। आत्मपरक या वस्तुपरक के साथ अपने संबंध के अतिरिक्त कुछ भी अस्तित्वमान नहीं है। वे इस महान सत्य का साक्षात्कार कर चुके थे।

एक दिन सुभूति शून्य की उदात्त मनःस्थिति में पेड़ के नीचे बैठे थे। उन पर पुण्य बरसने लगे। हम तुम्हारी शून्यानुभूति के लिए तुम्हारी अभ्यर्थना करते हैं। देवताओं ने उनके कानों में बुदबुदा कर कहा।

पर मैंने तो शून्य के बारे में कुछ नहीं कहा, हमने शून्य के बारे में कुछ नहीं कहा, सुभूति बोले। तुमने शून्य के बारे में कुछ नहीं कहा, हमने शून्य के बारे में कुछ नहीं सुना।

देवताओं ने शून्य पर अपना अभिमत रखा, यही वास्तविक शून्य है। सुभूति पर पुष्पवर्षा होती रही।

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