पूर्व मंत्री अनिल शर्मा पर चार्जशीट की तलवार

इस्तीफा दे चुके मंत्री पर भाजपा ने विपक्ष में रहते लगाए हैं कई आरोप

शिमला – जयराम कैबिनेट में मात्र 15 महीने का मेहमान बन कर इस्तीफा दे चुके पूर्व मंत्री अनिल शर्मा पर अब भाजपा चार्जशीट की तलवार लटक सकती है। हालांकि पूर्व में विपक्ष में रहते भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ चार्जशीट तैयार की थी, लेकिन 2017 के चुनाव में अनिल शर्मा भाजपा में शामिल हुए तो वर्तमान भाजपा सरकार ने उनके आरोपों को विजिलेंस से भी दूर रखा। इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्होेंने अपने बेटे की राजनीति के लिए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार अनिल शर्मा पर लगे आरोपों की फाइल खोलने के लिए विजिलेंस को आदेश दे सकती है। पूर्व की वीरभद्र सरकार में अनिल शर्मा पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर थे, तो भाजपा चार्जशीट में उन पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। हालांकि पिछले 15 महीने से अनिल शर्मा पर लगे आरोप पूरी तरह से बंद हो गए थे, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव नतीजे के साथ ही जांच खुल सकती है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के नाते विजिलेंस ने भी अनिल शर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए गृह विभाग से मंजूरी नहीं मांगी। अब अनिल शर्मा न तो सरकार में मंत्री हैं और न ही भाजपा के साथ हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार की जांच एजेंसी विजिलेंस कभी भी पुरानी फाइल खोल सकती है। भाजपा चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि अनिल शर्मा ने 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आय व संपत्ति के हल्फनामे में मंडी स्थित होटल, जो पिछले पांच साल बंद रहा तथा सूरत में 1970 में लगाए सेब के बागीचे, जिसमें सेब के पेड़ सूख चुके हैं, से करोड़ों रुपए की आमदनी कैसे दर्शाई है?

दवा घोटाले का भी इल्जाम

भाजपा चार्जशीट में अनिल शर्मा पर पशुपालन विभाग में दवा घोटाले के आरोप लगे हैं। आरोप हैं कि पशुपालन विभाग ने वर्ष 2014-15 के लिए दवाइयां खरीदने के लिए जिन 30 फर्मों के साथ रेट कांट्रैक्ट किया, उनमें से 15 फर्में सरकार व विभाग ने ब्लैकलिस्ट या डी-बार कर रखी हैं। चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा शिकायत करने के बाद भी कारवाई न करना दर्शाता है, उस घोटाले में मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री का भी हाथ है।

जमीन सौदे का आरोप

चार्जशीट में जिला मंडी के राजमहल जमीन बेनामी सौदे में अनिल शर्मा के बैंक खाते से लाखों रुपए संजय कुमार के खाते में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। भाजपा का आरोप है कि ये बेनामी सौदा खूब राम के नाम हुआ, जिसका सूत्रधार संजय था। मंत्री रहते अनिल शर्मा ने मंडी शहर में अपने होटल मैफेअर को केवल तीन मंजिल अनाने की स्वीकृति नगर परिषद, टीसीपी से ली थी, जबकि उस होटल की छह मंजिलें अनाधिकृत रूप से बनी है। पांच वर्ष लगातार इसकी मुरम्मत होती रही और अब जांच से बचने के लिए होटल का नाम बदल कर रिजेंट पाम रख दिया।

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