पूर्व सैनिकों की हैल्थ स्कीम में घपला

फर्जी पाए गए 500 करोड़ रुपए के बिल, कई अस्पतालों में जारी है खेल

नई दिल्ली -पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों के लिए बनी हैल्थ स्कीम एक्स सर्विसमैन कांट्रिब्यूट्री हैल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में लगातार फर्जी बिल आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक साल में अलग-अलग हास्पिटल से ईसीएचएस के पास जितने बिल आ रहे हैं, उनमें से 16-20 पर्सेंट बिल गलत पाए गए हैं। पिछले साल के ही करीब 500 करोड़ रुपए के बिल या तो फर्जी हैं या उस ट्रीटमेंट का भी बिल जोड़ दिया गया है जो ट्रीटमेंट किया ही नहीं गया। इसमें बिल को बढ़ा कर देने के मामले के साथ ही बिना जरूरत के ही पेशंट को एडमिट करने के भी मामले भी हैं। सूत्रों के मुताबिक आर्मी की तरफ से कई बड़े प्राइवेट हास्पिटल को करप्ट प्रैक्टिस की वजह से ईसीएचएस पैनल से बाहर करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन बाहरी दबाव की वजह से उन पर एक्शन नहीं लिया जा सका है। सूत्रों का कहना है कि इस करप्ट प्रैक्टिस की जानकारी आर्मी के साथ ही रक्षा मंत्रालय को भी है। सूत्रों का कहना है कि डिपार्टमेंट ऑफ एक्स सर्विसमैन वेलफेयर में गड़बड़ी की बातें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक मेरठ, नोएडा और पानीपत के कुछ हास्पिटल के खिलाफ डीइंपैनल्मेंट (पैनल से बाहर करना) की कार्रवाई आर्मी की तरफ से शुरू की गई थी, लेकिन मंत्रालय के कुछ सीनियर अधिकारियों ने इसमें हस्तक्षेप किया। मेरठ के एक केस में आर्मी के मेजर जनरल लेवल के एक अधिकारी ने जांच की और डीइंपैनलमेंट की सिफारिश की, लेकिन इसे भी रोक लिया गया। करप्ट प्रैक्टिस की शिकायत पर मेरठ के एक हास्पिटल की मेरठ हैडक्वार्टर ने जांच की और पिछले साल आठ अगस्त को मंत्रालय की तरफ से इंस्पेक्शन हुआ। 29 अगस्त को कंपीटेंट बोर्ड ऑफ आफिसर्स (डाक्टर्स की टीम) ने फिर से इंस्पेक्शन किया। बोर्ड ने कहा कि यह हास्पिटल इंपैनलमेंट के लिए अनफिट है और इस सिफारिश को जीओसी ने भी अपू्रव किया। केस नवंबर, 2018 में आगे बढ़ा और इंपैनलमेंट सेक्शन की तरफ से मंत्रालय को पत्र भेजा गया, लेकिन कुछ हुआ नहीं। नोएडा के एक बड़े हास्पिटल के केस में एक पूर्व मुख्यमंत्री मंत्रालय आए और हास्पिटल के इंपैनलमेंट को खत्म की प्रक्रिया रोकने की कोशिश की। जांच में पाया गया था कि उस हास्पिटल ने बिल बढ़ा कर और गलत बिल भेजे हैं।

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