प्रचार के अंतिम दौर में राजनीतिक दलों ने झोंकी ताकत

पांवटा साहिब -प्रदेश में आखिरी चरण मंे 19 मई को होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। दोनों मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस प्रचार अभियान में जहां प्रदेश में केंद्रीय मंत्रियों सहित पार्टी के बड़े नेता दस्तक दे रहे हैं, वहीं छोटे-छोटे नगरों में भी पड़ोसी राज्यों के बड़े नेताओं की सभाएं कर वोटरों को अपने पक्ष मंे करने की पूरी कवायद चल रही है। इसी के तहत प्रदेश के सीमांत नगर पांवटा साहिब मंे भी बुधवार को पड़ोसी राज्यों के दो बड़े नेता पहुंचे। इसमें पंजाब राज्य में मंत्री व कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू और उत्तराखंड के भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शामिल रहे। दोनों ही नेताओं ने अपने-अपने दल के लिए जनसभाएं की। बुधवार को पांवटा साहिब का राजनैतिक पारा भी उफान पर रहा। कांग्रेस ने पांवटा साहिब के रामलीला मैदान में जनसभा आयोजित की, जिसमें विशेषतौर पर नवजोत सिंह सिद्धू को बुलाया गया। उन्होंने यहां पहुंचकर भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किए। सिद्धू की पांवटा साहिब मंे जनसभा करवाने के पीछे राजनैतिक विशेषक एक कारण यह भी मान रहे हैं कि पांवटा सिख बहुल क्षेत्र है तथा उनके दौरे से सिख वोटरों को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करवाने के लिए प्रेरित करना भी रहा है। वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भाजपा सरकार है। यहां के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पांवटा के गिरिपार क्षेत्र के भंगानी में जनसभा की। यह क्षेत्र उत्तराखंड राज्य से छूता हुआ है और बीते मार्च में ही मुख्यमंत्री रावत ने विकासनगर से भंगानी के लिए यमुना नदी पर पुल निर्माण का शिलान्यास किया है, जिससे दोनों राज्यों के लोगों को फायदा मिलना है। ऐसे में भाजपा उनके कार्यों को पार्टी के लिए भुनाने मंे जुटी हुई है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी भाजपा सरकार को विकास का सिंबल बताते हुए कांग्रेस पर धर्म व जाति के नाम पर लोगों को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया और शिमला सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप के लिए जनसमर्थन मांगा। बहरहाल प्रदेश में चुनावी पारा अब चरम पर पहुंच चुका है।

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