प्रतिबंधित धाराओं पर घुमंतु गुज्जरों को मवेशी चराने पर लगे रोक

सलूणी—उपमंडल की प्रतिबंधित उपरी धाराओं पर घुमंतु गुज्जरों के पशु चराने और आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग उठाई है। स्थानीय लोगों ने कहा कि अदालती आदेशों के बाद भी घुंमतु गुज्जर बेरोकटोक पशुओं संग प्रतिबंधित धाराओं पर डेरा डाल बैठे हैं। जिस कारण जड़ी-बूटियों व अन्य वनसंपदा को नुकसान हो रहा है। भांदल घाटी के लंगेरा व  प्रियंुगल के मोहम्मद सलीम, महबूब खान, मोहम्मद शरीफ, देवेंद्ग सिंह, रविंद्र सिंह, महिंद्र सिंह व राकेश कुमार आदि ने बताया कि इलाके की सेंक्चुरी एरिया की 13 धाराओं के प्रतिबंधित होने के बावजूद घुमंतू गुज्जर अपने मवेशियों को चराने हेतु वहां ले जा रहे हैं, जिस कारण प्राकृतिक जड़ी-बूटियों व अन्य वन संपदा को नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रशासन व वन विभाग से मांग की है कि अवैध रूप से धाराओं पर चरान हेतु जा रहे इन घुमंतू गुज्जरों को रोका जाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से न्यायालय के आदेशों पर सेंचुरी एरिया को द्गतिबंधित किया गया है। जिसके बाद सेंचुरी एरिया की 13 धाराओं के 7090 हेक्टेयर एरिया में किसी को भी चारागाह बनाकर चरान कराने के परमिट जारी नही किए जा सकते। मगर बावजूद इसके घुमंतू गुज्जर अपनी भैंसों, घोड़े व अन्य मवेशियों को इन प्रतिबंधित धारों पर ले जा रहे हैं, जोकि सरासर अदालती आदेशांे की अवहेलना है। उन्होंने प्रशासन व वन विभाग से मांग की है कि अवैध रूप से धाराओं पर चरान हेतु जा रहे इन घुमंतु गुज्जरों को रोका जाए। बतातें चलें कि मैदानी इलाकों में गरमी की तपिश बढ़ने के साथ ही घुंमतु गुज्जर अपने मवेशियों संग ऊपरी धाराओं का रुख करते हैं।  

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