प्रभु नहीं, उनके आश्रय की तलाश करें

अंब—भक्ति का निचोड़ है समर्पण। परमात्मा सबके लिए है। यहां तक कि ईश्वर के अधीन रहने वाले पशु-पक्षी भी अपने कल्याण को प्राप्त हो गए। उक्त ज्ञानसूत्र परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस में शिव मंदिर, नैहरियां में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दुश्मन एक नहीं दस हजार हो जाए फिर भी जिसकी प्रभु चरणों में निष्ठा है उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता। हमें प्रभु की नहीं उनके आश्रय की तलाश करनी है। जीवन में सब्र रखना एवं प्रभु के विधान में संतुष्ट रहना सर्वोत्तम भक्ति है। असत्य के आगे घुटने टेक देना हमारी दुर्बलताओं का द्योतक है। उन्होंने कहा कि सच्ची लगन से व्यक्ति गगन को छू लेता है। जीवन में दृढ़ निश्चय एवं प्रेममय संकल्प की प्रतिबद्धता परमात्मा को निराकार से साकार बना देती है। जिसके ऊपर प्रभु की कृपा हो जाती है सफलता एवं सद्गुण उस व्यक्ति की चरण चंपी करते देखे जाते हैं। परमात्मा की प्रार्थना से ही सफलता का सवेरा होता है। जिस घर में सुमति होती है लक्ष्मी जी चाह कर भी उस घर को नहीं छोड़ पाती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति जिस किसी भी भाव से की जाए सब अच्छी ही है। खुद को भगवान पर निर्भर बना कर कर्म करते रहें। प्रभु इच्छा से जो भी परिणाम आएगा सब मंगलकारी ही होगा। कथा एवं सत्संग अमृत है जबकि कुसंग विश। अतः सत्संग को श्रेय दें कुसंग को नहीं। सोमवार को कथा में श्रीमद्भागवत जी का महात्म्य, भक्ति की महिमा, राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋशि का श्राप, भगवान शुकदेव का गंगा के तट पर आगमन, सृष्टि वर्णन, मुक्ति के प्रकार, भगवान के 24 अवतार, देवहूति एवं कर्दम ऋषि का चरित्र, एवं प्रभु भक्तों के लक्षण श्रोताओं ने तन्मय होकर सुना। इस अवसर पर अशोक कुमार, पं अश्विनी कौंडिन्य, अजय शर्मा, तिलकराज शर्मा, मास्टर ओमदत्त शर्मा, अश्विनी शर्मा, अनिल शर्मा, सुनील शर्मा, सोमनाथ शर्मा, राजिंद्र शर्मा, महेश षर्मा, रमन शर्मा, विजय कुमार, मुनीश कुमार, दीपक र्श्मा, डा. राजकुमार गौतम सहित अन्य उपस्थित रहे। कथा से पूर्व शोभायात्रा भी निकाली गई।

You might also like