प्राकृतिक खेती से जोड़े 3500 किसान

पालमपुर में जैविक-प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय सम्मेलन में सामने आए आंकड़े

पालमपुर —प्रदेश के किसान प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित हो रहे हैं। इसका प्रमाण आंकड़े स्वयं दे रहे हैं। प्रदेश में इस वर्ष पांच सौ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि अब तक साढ़े तीन हजार किसान इस विधि की खेती से जोड़े जा चुके हैं।  यह आंकड़े प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में ‘जैविक व प्राकृतिक कृषि’ पर मंगलवार को शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कांन्फ्रेस में सामने आए हैं। ‘‘टिकाऊ खेती व आर्थिक विकास हेतु जैविक व प्राकृतिक कृषि एक माध्यम’’ विशय पर आयोजित किए जा रहे राश्ट्रीय सम्मेलन में देष भर से पहुंचे 125 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्त्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कृषि मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने बताया कि वर्ष 2022 तक राज्य को जैविक कृषि राज्य घोषित कर दिया जाएगा।  इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे डा. वाईएस परमार उद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के कुलपति डा. हरिचंद शर्मा ने जैविक व प्राकृतिक कृषि हेतु जल संग्रह, जल संरक्षण व जल के सदुपयोग के महत्त्व पर बल देने के साथ जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादकों की आर्थिक स्थिति तथा उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। प्रदेष कृशि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार सरयाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय में 25 रुपए करोड़ लागत से एक अति आधुनिक संरक्षित व प्राकृतिक कृषि केंद्र की स्थापना किए जाने के प्रयास हो रहे हैं। कार्यक्रम के आयोजक सचिव डा. जेपी. सैनी ने  कुछ प्रकाशनों का विमोचन भी करवाया। कृषि विभाग के निदेशक डा देशराज, भारत भूषण त्यागी, शून्य लागत प्राकृतिक कृषि के एग्जेक्यूटिव निदेशक डा. राजेश्वर चंदेल तथा कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. एनके बधान सहित कई प्रगतिशील किसान उपस्थित थे। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने जैविक व प्राकृतिक कृषि पर लगाई गई एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और किसानों को सम्मानित किया।

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